आनंदपुर में फिर सुलगा होलिका दहन स्थल का विवाद, आश्वासन के बाद भी अतिक्रमण जस का तस


आनंदपुर। ग्राम आनंदपुर में वर्षों पुरानी होलिका दहन की परंपरा एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जिस स्थान पर लंबे समय से होलिका दहन किया जाता रहा है, वहां कथित अतिक्रमण के चलते इस बार भी परंपरागत स्थल बाधित हो गया है। इसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीण विवेक कुशवाहा ने बताया कि पिछले वर्ष भी पारंपरिक स्थल उपलब्ध नहीं होने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने बीच सड़क पर ही होलिका दहन कर दिया था। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची थी। अधिकारियों ने समझाइश देते हुए आश्वासन दिया था कि अगली बार होलिका दहन पूर्व निर्धारित पारंपरिक स्थल पर ही कराया जाएगा।
आधी रात को पहुंचे थे तहसीलदार, कराया था दहन
पिछले साल होली दहन को लेकर कुछ लोगों ने अतिक्रमण की शिकायत की थी। अवैध मकान पर कार्रवाई को लेकर विवाद की स्थिति बन गई थी। मामला बढ़ने पर अर्धरात्रि में तत्कालीन तहसीलदार हेमंत अग्रवाल स्वयं मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर विवाद शांत कराया। उनके हस्तक्षेप के बाद होलिका दहन कराया गया। उस समय अवैध निर्माण पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया था।
हालांकि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। कथित अवैध मकान पर कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराज़गी बनी हुई है।

इस साल फिर निरीक्षण, लेकिन कार्रवाई का इंतजार

इसी क्रम में इस वर्ष तहसीलदार एवं थाना प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर होलिका दहन स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों से चर्चा भी की। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अब तक अतिक्रमण हटाने को लेकर कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है।

सीएम हेल्पलाइन पर भी दर्ज है शिकायत

आनंदपुर के ग्रामीण विवेक कुशवाहा ने इस संबंध में सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत क्रमांक 304749**, दिनांक 07-01-2025 को दर्ज कराई थी। शिकायत में शासकीय जमीनों से अतिक्रमण हटाने की मांग की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि एक साल बीतने के बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों के सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि जब पिछले वर्ष प्रशासन ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था, तो उस पर अमल क्यों नहीं हुआ? क्या प्रशासनिक स्तर पर कोई दबाव है या फिर अतिक्रमण हटाने से अधिकारी बच रहे हैं?
फिलहाल प्रशासन जांच और उचित कार्रवाई की बात कह रहा है, लेकिन ग्रामीण इस बार केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहते हैं, ताकि वर्षों पुरानी होलिका दहन की परंपरा बिना विवाद के जारी रह सके।

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