लटेरी मोतीपुर। तहसील मुख्यालय से महज 15-16 किलोमीटर दूर स्थित मोतीपुर ग्राम पंचायत में पेयजल संकट दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। 31 जनवरी 2025 को ‘गोद लिया गांव या छोड़ दिया गया गांव’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि प्रशासन सक्रिय होगा, लेकिन 25 दिन बीत जाने के बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ।
पीएचई विभाग के एसडीओ देवी सिंह ने एक से डेढ़ सप्ताह के भीतर नए बोर की खुदाई और समस्या समाधान का आश्वासन दिया था। तय समय सीमा गुजरने के बाद भी न तो नया बोर खुदा और न ही पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं।
गांव में एकमात्र बोरिंग से जो पानी निकल रहा है, वह साफ नहीं बल्कि मटमैला और कीचड़ जैसा दिखाई देता है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी में बदबू और गंदगी है, लेकिन मजबूरी में वही पानी पीना पड़ रहा है। स्वच्छ पेयजल के अभाव में बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंता गहराती जा रही है।
हर शाम बिजली आने के बाद बोरिंग पर भीड़ उमड़ पड़ती है। महिलाएं और बुजुर्ग देर रात तक लाइन में खड़े रहते हैं। कई बार पानी को लेकर धक्का-मुक्की और विवाद की स्थिति बन जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तो किसी तरह गुजारा हो रहा है, लेकिन गर्मी बढ़ते ही संकट और विकराल रूप ले सकता है।
ग्राम निवासी सीताराम शर्मा ने कहा कि यदि प्रशासन ने शीघ्र अति शीघ्र पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं की तो ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बाद भी सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं।
वहीं स्थानीय निवासी सजीव कुर्मी ने बताया कि कई बार अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद कोई इंतजाम नहीं किए गए। यदि एक सप्ताह के भीतर पानी का प्रबंध नहीं किया गया तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे।
मामले से जनपद सीईओ को भी अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं हुई।
सवाल यह है कि क्या प्रशासन तब जागेगा जब हालात और बिगड़ेंगे, या फिर समय रहते मोतीपुर के प्यासे ग्रामीणों को राहत मिलेगी?




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