ओखली खेड़ा पंचायत में पानी की किल्लत, लाखों की लागत से बनी टंकी शोपीस बनी
शुभम सोनी आनंदपुर। जिले के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत ओखली खेड़ा के ग्रामीण आज भी पीने के पानी के लिए परेशान हैं। पंचायत में लाखों रुपए की लागत से बनाई गई पानी की टंकी ग्रामीणों की प्यास बुझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। हालात यह हैं कि ग्रामीणों को खेतों और अन्य निजी संसाधनों से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
ग्रामीण पुखराज जादौन ने बताया कि करीब 4 साल पहले पानी की टंकी का निर्माण किया गया था। शुरुआती दो माह तक गांव के कुछ मोहल्लों में पानी पहुंचा, लेकिन कई मोहल्लों तक सप्लाई शुरू ही नहीं हो पाई। इसके बाद से टंकी पूरी तरह बंद पड़ी है और बीते 4 सालों से यह केवल शोपीस बनकर खड़ी है।
वहीं सूरज पटेल का कहना है कि टंकी से महज दो-तीन महीने ही पानी मिल पाया। इसके बाद कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन आज तक टंकी को दोबारा चालू नहीं कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के नाम पर अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति कर चले गए।
ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पानी की टंकी निर्माण में ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की गजब की तालमेल देखने को मिली। चार साल पहले बनी पानी की टंकी की फाइव लाइन सप्लाई को 10–15 साल पुरानी जर्जर पाइपलाइन में ही जोड़ दिया गया। हालत यह है कि वह पाइपलाइन जगह-जगह से लीकेज है, इसलिए पानी टंकी से निकलने से पहले ही जमीन में समा जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन मोहल्लों में पानी कभी पहुंचा ही नहीं, वहां लाइन डालने की जहमत तक नहीं उठाई गई। इसके बावजूद कागजों में पूरी पाइपलाइन को नया बताकर भुगतान निकाल लिया गया। आरोप है कि ठेकेदार और अधिकारियों ने मिलीभगत कर पुरानी लाइन को नई साबित कर दिया और भ्रष्टाचार को विकास का नाम दे दिया।
ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा कि टंकी तो नई है, लेकिन उससे जुड़ी व्यवस्था इतनी पुरानी है कि पानी आने से पहले ही सिस्टम जवाब दे देता है। नतीजा यह कि लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी गांव के कई मोहल्लों तक पानी की एक बूंद नहीं पहुंच पा रही है, और पूरी योजना केवल भ्रष्टाचार की पहचान बनकर रह गई है।
अधिकारियों का बयान
इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी PHE अनुपम गोगोई ने कहा,
“मामले की पूरी जानकारी लेकर 2 से 4 दिनों के भीतर पानी की मोटर लगवा दी जाएगी, जिससे ग्रामीणों को समय पर पीने का पानी मिल सके।”
अब देखना यह होगा कि प्रशासन के इस आश्वासन के बाद कब तक ओखली खेड़ा के ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल नसीब हो पाता है।




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