अलाव में गिरने से झुलसी पांच माह की बच्ची की इलाज के अभाव में मौत, सिस्टम पर उठे सवाल
लटेरी (विदिशा/गुना सीमा)। कड़ाके की ठंड में अलाव तापते समय हुए हादसे के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता ने एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर दिया। विदिशा जिले की लटेरी तहसील के ग्राम नीसो बर्री में अलाव में गिरने से झुलसी पांच माह की मासूम बच्ची आराध्या अहिरवार की इलाज के अभाव में मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि लटेरी में चार एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद मौके पर एक भी एंबुलेंस बच्ची को नहीं मिल सकी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दौलतराम अहिरवार की पांच माह की बेटी आराध्या घर के बाहर अलाव ताप रहे बच्चों के पास खेलते हुए अचानक फिसलकर जलते अलाव में जा गिरी। परिजन तत्काल उसे लटेरी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां बच्ची की गंभीर हालत देखकर भी अस्पताल प्रबंधन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। परिजनों ने सरकारी एंबुलेंस की मांग की, लेकिन घंटों इंतजार और मिन्नतों के बावजूद कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।
चार एंबुलेंस, फिर भी नहीं मिली सुविधा
जानकारी सामने आई है कि लटेरी में कुल चार एंबुलेंस तैनात हैं, जिनमें दो जननी एक्सप्रेस और दो 108 सेवा की एंबुलेंस शामिल हैं। इसके बावजूद बच्ची को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल सकी। मजबूरी में गरीब परिजनों को निजी वाहन का इंतजाम कर बच्ची को गुना जिला अस्पताल ले जाना पड़ा, लेकिन रास्ते में ही मासूम ने दम तोड़ दिया।
इस मामले में 108 सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह ने कहा कि संभव है एंबुलेंस अशोकनगर, गुना या विदिशा की ओर रेफर केस लेकर गई हों। मामले की जांच कराई जाएगी और यदि कोई दोषी पाया गया तो उस पर कार्रवाई होगी।
वहीं बीएमओ अभिषेक उपाध्याय ने कहा कि 108 सेवा के लिए डॉक्टर और आम आदमी के लिए एक ही नंबर है, कोई अलग व्यवस्था नहीं है। परिजन अक्सर डॉक्टरों पर दबाव बनाते हैं, जबकि 108 एंबुलेंस सेवा एक अलग विभाग के अंतर्गत आती है।
उठ रहे गंभीर सवाल
इस हृदयविदारक घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि जब लटेरी जैसे कस्बे में चार-चार एंबुलेंस उपलब्ध हैं, तो एक गंभीर रूप से झुलसी मासूम बच्ची को समय पर मदद क्यों नहीं मिल सकी? अब देखना यह है कि जांच के बाद वास्तव में जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।




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