किसानों के दबाव में झुका कृषि विभाग, 4 दिन बाद लौटाया 160 बोरी जब्त यूरिया



लटेरी।
किसानों के विरोध और आंदोलन की चेतावनी के आगे आखिरकार कृषि विभाग को झुकना पड़ा। विभाग ने 21 तारीख की रात जब्त किया गया 160 बोरी यूरिया चार दिन बाद किसानों को लौटा दिया। खास बात यह रही कि यूरिया लौटाते समय किसानों से कोई राशि नहीं ली गई।

यह यूरिया लटेरी क्षेत्र के 23 किसानों ने मकसूदनगढ़ से मंगवाया था। ई-टोकन के जरिए खाद नहीं मिलने पर किसानों ने आपस में पैसे जुटाकर यूरिया खरीदा था। 21 तारीख को जब यूरिया से भरा पिकअप वाहन लटेरी पहुंचा, तभी रास्ते में टायर पंचर हो गया। वाहन की मरम्मत के दौरान किसी ने कृषि विभाग को सूचना दे दी। मौके पर पहुंचे अफसरों ने दो पिकअप में लदा पूरा यूरिया जब्त कर लिया।

जब्ती से भड़के किसान, कार्यालय पहुंचकर किया विरोध

इस कार्रवाई से किसान आक्रोशित हो गए। बड़ी संख्या में किसान नेताओं के साथ कृषि विभाग कार्यालय पहुंचे और यूरिया लौटाने की मांग की। शुरुआत में अफसरों ने साफ इनकार कर दिया। अगले दिन विभाग ने प्रति बोरी 266 रुपए 5 पैसे जमा करने की शर्त रख दी। किसानों ने इसका विरोध किया और कहा कि वे पहले ही भुगतान कर चुके हैं।

चार दिन तक किसान और अफसर आमने-सामने रहे। विरोध के दौरान महिला किसानों ने नाराजगी जताते हुए अफसरों को चूड़ियां तक सौंप दीं। नारेबाजी और आंदोलन की चेतावनी के बाद मामला और गरमाता चला गया।
राजनीतिक तंज के बाद बदला फैसला
मामला बढ़ने पर एक दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर तंज कसा। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर किरकिरी की आशंका बढ़ गई। आखिरकार कृषि विभाग ने बिना कोई राशि लिए किसानों को यूरिया लौटाने का फैसला किया।

पंचनामा बनाकर लिए हस्ताक्षर

यूरिया लौटाते समय विभाग ने पंचनामा तैयार कराया और किसानों से हस्ताक्षर कराए। पंचनामे में यह शर्त लिखी गई कि भविष्य में किसी किसान की आपत्ति या कोर्ट के आदेश पर प्रति बोरी 266 रुपए 75 पैसे जमा करने होंगे। मजबूरी में किसानों ने हस्ताक्षर कर यूरिया लिया।

अफसरों के बयान विरोधाभासी

इस पूरे मामले में कृषि विभाग के अफसरों के बयान भी सवालों के घेरे में रहे।
उप संचालक के.एस. खापड़िया ने कहा कि किसानों की मांग पर जब्त यूरिया 266.75 रुपए प्रति बोरी के हिसाब से बेचा गया और जिले में यूरिया की कोई कमी नहीं है।
वहीं कृषि विस्तार अधिकारी रीतेश परमार ने कहा कि किसानों से कोई पैसा नहीं लिया गया, सिर्फ पंचनामे पर हस्ताक्षर कराए गए।
किसान नेता सुरेन्द्र रघुवंशी ने आरोप लगाया कि कलेक्टर और कृषि विभाग के अफसर किसानों को बेवजह परेशान कर रहे हैं। समय पर यूरिया नहीं मिला तो फसलें और नस्लें दोनों खत्म हो जाएंगी।

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