Shahdol Collector News: शहडोल कलेक्टर की गलती से निर्दोष युवक 1 साल जेल में, हाईकोर्ट ने ₹2 लाख जुर्माना लगाया

एमपी में कलेक्टर को भारी पड़ी गलत कार्रवाई, हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती

शहडोल कलेक्टर पर लगा ₹2 लाख जुर्माना, एक निर्दोष युवक ने बिताए 1 साल जेल में

शहडोल (मध्यप्रदेश)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने (Shahdol Collector) शहडोल कलेक्टर की मनमानी पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कलेक्टर की गलत कार्रवाई के चलते एक निर्दोष युवक को एक साल जेल में रहने पर मजबूर करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है।

मामला ब्यौहारी निवासी सुशांत बैस का है, जिसपर रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई कर दी गई थी। आरोप है कि यह कार्रवाई रेत ठेकेदारों के दबाव में की गई थी। (MP High Court )हाईकोर्ट ने इसे प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए कलेक्टर पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाया है और यह राशि पीड़ित युवक के खाते में जमा करने के आदेश दिए हैं।

कलेक्टर ने कोर्ट में मानी गलती

मामले की सुनवाई के दौरान ( Collector Kedar Singh )शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने हाईकोर्ट के समक्ष गलती स्वीकार की। कोर्ट ने कलेक्टर और एसपी दोनों को उपस्थित होने के आदेश दिए थे। पेशी के दौरान कलेक्टर ने अपनी भूल स्वीकार की, जिसके बाद कोर्ट ने इस प्रकरण को गंभीर माना और आर्थिक दंड के साथ जवाबदेही तय की।

एडिशनल चीफ सेक्रेटरी पर भी कोर्ट सख्त

High Court Action हाईकोर्ट ने पाया कि एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने भी मामले में गलत जवाब पेश किया था। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव से दोनों अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर जवाब तलब किया है।

वकील का दावा — माइनिंग माफिया के दबाव में कार्रवाई

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता रामेंद्र पाठक का कहना है कि (Mining Mafia MP) रेत ठेकेदारों के दबाव में प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर (NSA Case) रासुका की कार्रवाई की। एसपी के प्रतिवेदन में आरोपी के रूप में नीरज कांत द्विवेदी का नाम था, लेकिन कलेक्टर ने उसकी जगह Shushant Bais सुशांत बैस पर NSA लगा दी।

कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर त्रुटि मानते हुए कहा कि प्रशासन ने गलत तथ्य प्रस्तुत किए और झूठा हलफनामा दाखिल किया।

न्यायालय की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अधिकारियों की ऐसी लापरवाही न केवल संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी प्रश्न खड़ा करती है।

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