विदिशा, 03 नवम्बर 2025। विदिशा जिले में चल रहा ‘पोषण संजीवनी अभियान’ अब बच्चों के जीवन में नई उम्मीदें जगा रहा है। सिरोंज नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 16 की दो वर्षीय बालिका पलक केवट इसका जीता-जागता उदाहरण है। कभी गंभीर कुपोषण से जूझ रही पलक आज पूर्ण रूप से स्वस्थ है और सामान्य श्रेणी में आ चुकी है।
पलक के पिता मनीष केवट मोटर वाइंडिंग की दुकान पर कार्य करते हैं, परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। इसी बीच, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हेमलता जाटव ने बालिका की हालत को गंभीरता से लेते हुए 17 अगस्त 2025 को उसे पोषण पुनर्वास केंद्र सिरोंज में भर्ती कराया।
कलेक्टर की पहल से शुरू हुआ नवाचार
विदिशा जिले को कुपोषण से मुक्त करने के उद्देश्य से कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने एक अनूठी पहल के रूप में “पोषण संजीवनी अभियान – कुपोषण मुक्त विदिशा” की शुरुआत की। इस अभियान का लक्ष्य केवल बच्चों की पहचान करना नहीं, बल्कि उन्हें सतत पोषण सहायता, प्रशिक्षण और निगरानी के माध्यम से स्वस्थ बनाना है।
अभियान के तहत प्रत्येक कुपोषित बच्चे को तीन माह के लिए ₹3000 मूल्य की सुपोषण किट प्रदान की जा रही है। इसी क्रम में 19 नवम्बर को पलक के माता-पिता को भी यह किट दी गई।
सुपोषण किट में क्या-क्या मिला
इस किट में बच्चों और माताओं दोनों के लिए संतुलित खाद्य सामग्री दी गई —
चावल, आटा, मूंग दाल, गुड़, बेसन, घी, मसाले और मुरमुरा जैसे सूखे राशन पैक
गर्भवती व शिशुवती माताओं के लिए पौष्टिक लड्डू बनाने की सामग्री
पौष्टिक व्यंजनों की रेसिपी पुस्तिका
स्वास्थ्य संबंधी फ्लिप बुक, जिससे माताओं को घर पर पौष्टिक भोजन तैयार करने के तरीके सीखने में मदद मिली
निगरानी और परिणाम
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बालिका के माता-पिता को खाद्य सामग्री के उपयोग और पौष्टिक व्यंजन बनाने का प्रशिक्षण दिया। प्रत्येक पंद्रह दिन में पलक का वजन मापा गया और उसकी प्रगति दर्ज की गई। लगातार देखरेख और पौष्टिक भोजन के कारण पलक का वजन धीरे-धीरे बढ़ता गया। अब वह सामान्य श्रेणी में है और पूरी तरह स्वस्थ है।
पलक के माता-पिता मनीष और विनिता केवट ने बताया,
> “हमारी बेटी बहुत कमजोर थी, उसे चलने-फिरने में दिक्कत होती थी। अब वह खुश और तंदुरुस्त है। यह सब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और प्रशासन की मदद से संभव हुआ।”
कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने कहा,
> “हर बच्चे का स्वस्थ रहना ही हमारा असली विकास है। पोषण संजीवनी अभियान के माध्यम से हम विदिशा को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।”




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