भोपाल में पंचायत सम्मेलन के दौरान सीएम मोहन यादव के बयान पर मचा सियासी बवाल, कांग्रेस ने बताया मुख्यमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित पंचायत सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बयान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पंचायत सचिवों और सहायक सचिवों को लेकर तीखी टिप्पणी की, जिस पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है।
क्या कहा मुख्यमंत्री ने?
पंचायत सम्मेलन में बड़ी संख्या में सरपंच और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने कहा –
> “एक बात समझ लो, कोई सचिव अगर काम नहीं करेगा तो साले को हटा देंगे। सचिव-सहायक सचिव, इनकी क्या औकात?”
मुख्यमंत्री का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। जहां कुछ लोग इसे पंचायत व्यवस्था में जवाबदेही तय करने वाला बयान बता रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे अपमानजनक करार दे रहे हैं।
जीतू पटवारी का पलटवार – "मुख्यमंत्री पद की गरिमा गिराई"
मुख्यमंत्री के इस बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने न सिर्फ पंचायत सचिवों और सहायक सचिवों का अपमान किया है, बल्कि अपने पद की गरिमा का भी हनन किया है।
पटवारी ने कहा –
> “मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह बयान बेहद आपत्तिजनक है। यह पंचायत व्यवस्था का अपमान है। उन्हें तुरंत पंचायत सचिवों और सहायक सचिवों से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।”
“गांव की सरकार के अधिकार छीने जा रहे हैं”
जीतू पटवारी ने आगे कहा कि सरकार ने पहले ही पंचायतों के अधिकार खत्म कर दिए हैं और अब उनके कर्मचारियों को गालियां देकर उनका मनोबल तोड़ा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया –
> “पंचायत मंत्री ने कुछ महीने पहले सरपंचों को भिखारी कहा था और अब मुख्यमंत्री सचिवों को औकात बता रहे हैं। क्या यही ग्राम स्वराज की परिकल्पना है?”
भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया
कांग्रेस अध्यक्ष ने पंचायत विभाग में 50 फीसदी से अधिक भ्रष्टाचार होने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह मानती है कि विभाग भ्रष्टाचारमुक्त है, तो वह सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करे, “अन्यथा मैं खुद सबूत पेश कर दूंगा।”
राजनीति में बढ़ा विवाद
मुख्यमंत्री के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर सरकार पर हमलावर है, जबकि सत्ता पक्ष ने अब तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। सूत्रों के मुताबिक, पंचायत सचिव संगठन भी मुख्यमंत्री के बयान की निंदा करते हुए ज्ञापन देने की तैयारी में है।
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