सीएम मोहन यादव की बड़ी घोषणा: सरपंचों को दफ्तर कार्यों के लिए मिलेंगे 50 हजार रुपए अलग से


सीएम मोहन यादव की बड़ी घोषणा: सरपंचों को दफ्तर कार्यों के लिए मिलेंगे 50 हजार रुपए अलग से

भोपाल (एमपी न्यूज़)।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित सरपंचों के संयुक्त मोर्चा सम्मेलन में एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी सरपंचों को अब अलग से 50 हजार रुपए की राशि दी जाएगी। यह राशि दफ्तर से जुड़े कार्यों और प्रशासनिक जरूरतों के लिए उपयोग की जा सकेगी।

अब तक सरपंचों को इस तरह की कोई अलग राशि नहीं दी जाती थी। मुख्यमंत्री की यह घोषणा पहली बार है जब पंचायत प्रतिनिधियों को उनके दफ्तर के सुचारु संचालन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

पंचायतों को मिलेगा अलग बजट, विकास योजनाएं शहरों की तर्ज पर बनेंगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पंचायतें भी नगरीय निकायों की तरह विकास की योजनाएं तैयार करें। इसके लिए सरकार द्वारा उन्हें अलग से बजट दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश में —

2472 अटल पंचायत भवन,

1037 सामुदायिक भवन,

106 जनपद पंचायत भवन,

और 5 जिला पंचायत भवन स्वीकृत किए जा चुके हैं।


मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि गांवों के “शांति धाम” (श्मशान घाट) को भी व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाएगा। दिसंबर 2026 तक सभी शांति धामों को अतिक्रमण से मुक्त कर, वहां पहुंच मार्ग, फेंसिंग और पौधरोपण की व्यवस्था की जाएगी।

सरपंचों को 25 लाख तक के कार्यों का अधिकार भाजपा सरकार ने दिया — सीएम मोहन यादव

मुख्यमंत्री ने बताया कि भाजपा सरकार ने ही सरपंचों को 25 लाख रुपए तक के निर्माण कार्यों का अधिकार दिया है। पहले सरपंचों को छोटे कामों के लिए भी जिलों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब जनपद स्तर पर ही अनुमति मिलने से विकास कार्यों में तेजी आई है।

प्रहलाद पटेल ने कहा – पंचायतें बनेंगी देश का सबसे बड़ा रिकॉर्ड रूम

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने सम्मेलन में कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सरपंचों को अधिक अधिकार देना एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पंचायतें अब देश का सबसे अच्छा और सबसे बड़ा रिकॉर्ड रूम बन सकती हैं।

मंत्री पटेल ने यह भी बताया —

जिन पंचायतों में नदी के उद्गम स्थल हैं, वहां सरपंच अपनी कार्ययोजनाओं में उनके संरक्षण और रखरखाव को प्राथमिकता दें।

जिन पंचायतों की जनसंख्या 5000 से अधिक है, उन्हें दो सामुदायिक भवन दिए जाएंगे।
उन्होंने ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी प्रतिनिधियों को दी।

मुख्यमंत्री की जुबान फिसली, सियासत गरमाई

सम्मेलन के दौरान एक क्षण ऐसा भी आया जब मुख्यमंत्री मोहन यादव की जुबान फिसल गई।
कई सरपंचों ने शिकायत की कि सचिव और रोजगार सहायक उनकी बातों को तवज्जो नहीं देते। इस पर मुख्यमंत्री ने मंच से कहा —

> “इनकी औकात क्या है? अगर सुनवाई नहीं करेंगे तो हटा देंगे, डरने की जरूरत नहीं है।”

उनके इस बयान से सियासी हलचल मच गई।
कांग्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति, बोली – यह ग्राम स्वराज की हत्या है

मुख्यमंत्री के बयान पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा —

> “मुख्यमंत्री का यह बयान अत्यंत अपमानजनक है। सचिव और रोजगार सहायकों के प्रति इस तरह की भाषा का उपयोग ग्राम स्वराज की भावना की हत्या है।”
पटवारी ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर कांग्रेस सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विकास कार्यों को बढ़ावा देने के बजाय जनसेवकों का अपमान कर रहे हैं।

दिल्ली विस्फोट पर पीएम के रवैये की आलोचना

पटवारी ने दिल्ली में हुए भीषण विस्फोट को लेकर केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा —

> “दिल्ली में हादसे के 12 घंटे भी नहीं बीते और प्रधानमंत्री भूटान यात्रा पर रवाना हो गए। यह संवेदनहीनता का उदाहरण है।”



उन्होंने सरकार से मांग की कि सेना, इंटेलिजेंस एजेंसियां और दिल्ली पुलिस मिलकर घटना की गहन जांच करें और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करें।

कांग्रेस का नवसृजन अभियान: गुटबाजी खत्म कर मिशन 2028 की तैयारी

पटवारी ने आगे कहा कि कांग्रेस अब संगठनात्मक रूप से नवसृजन प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से नई रणनीति बना रही है जिलाध्यक्षों के प्रशिक्षण के बाद अब मंडल और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित होंगे।
पार्टी गुटबाजी समाप्त करने और एकजुटता के साथ मिशन 2028 की तैयारी कर रही है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी चाहे जितना संगठन विस्तार करे, जनता में बढ़ता विरोध साफ दिखाई दे रहा है।

एग्जिट पोल पर बोले पटवारी – जल्दबाजी की जरूरत नहीं

बिहार चुनाव के एग्जिट पोल पर प्रतिक्रिया देते हुए पटवारी ने कहा कि तीन दिन बाद सच्चाई सामने आ जाएगी, इसलिए एग्जिट पोल पर प्रतिक्रिया देने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

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