शुभम सोनी बैतूल। कहते हैं गुरु का स्थान सबसे ऊँचा होता है, लेकिन यहां तो मामला कुछ ज़्यादा ही ऊँचा निकल गया।
देश के केंद्रीय राज्य मंत्री आज भी सरकारी रिकॉर्ड में “उच्च श्रेणी शिक्षक” हैं — जी हाँ, एजुकेशन पोर्टल के मुताबिक मंत्री जी अब भी बघोली हाईस्कूल में वर्किंग टीचर के रूप में पदस्थ हैं।
लगता है सिस्टम ने तय कर लिया है —
“त्यागपत्र भले दे दो, लेकिन त्याग हम नहीं करेंगे!”
सात साल पहले मंत्री जी ने अध्यापन छोड़ राजनीति की क्लास जॉइन की थी। दो बार सांसद बने, कुर्सी मंत्री पद की मिली, पर पोर्टल साहब अब भी मानने को तैयार नहीं।
कहते हैं सॉफ्टवेयर में ‘बग’ होता है, लेकिन यहां तो ‘भगवान भरोसे’ वाला बग है — जो सात साल से अपडेट नहीं हुआ।
पोर्टल का प्रेम
पोर्टल का मंत्री जी से लगाव इतना गहरा है कि उनके जन्मदिन पर भी भूल नहीं पाया।
29 अक्टूबर को जब पूरे बैतूल में बधाइयों की बारिश हो रही थी, तब एजुकेशन पोर्टल भी पीछे नहीं रहा — उसने लिखा,
“हैप्पी बर्थडे हमारे प्यारे उच्च श्रेणी शिक्षक दुर्गादास उइके जी!”
वाह पोर्टल बाबू, ऐसी निष्ठा तो स्कूल के बच्चे भी नहीं दिखाते।
विभाग की क्लास
जैसे ही मामला मीडिया में आया, शिक्षा विभाग के अधिकारी अचानक "अलर्ट मोड" में आ गए
कोई फाइल ढूंढ रहा था, कोई पासवर्ड याद कर रहा था, कोई यह सोच रहा था कि आखिर पोर्टल में लॉगिन कैसे करें।
शाला के प्राचार्य महोदय ने गंभीर मुद्रा में कहा — “गलती सुधार दी जाएगी।”
बस, इतना सुनते ही सबको समझ आ गया कि अब यह गलती अगले जन्मदिन तक सुधरेगी।
जनता का सवाल
जनता कह रही है — अगर मंत्री जी आज भी टीचर हैं, तो फिर मंत्रालय में उनकी उपस्थिति कौन दर्ज कर रहा है?
और अगर वे वहां मंत्री हैं, तो पोर्टल में कौन उपस्थिति लगा रहा है?
शायद यही ‘डबल इंजन’ सरकार का असली मतलब है — एक इंजन संसद में, दूसरा पोर्टल में।
सिस्टम की घंटी भी बजाना जरूरी है
बैतूल का यह मामला बताता है कि हमारा एजुकेशन सिस्टम सिर्फ बच्चों को नहीं, डेटा को भी “कक्षा में रोके” रखने में माहिर है।
सात साल से सिस्टम ने शिक्षक को प्रमोशन नहीं दिया, पर हाज़िरी रोज़ लगवा रहा है —
कहिए, इससे ज़्यादा “समर्पण” कहां मिलेगा?




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