अनंत चतुर्दशी पर श्री जी का नगर भ्रमण, दशलक्षण पर्व का भव्य समापन

आनंदपुर। पर्यूषण पर्व के अवसर पर शनिवार को जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा भगवान महावीर जी की भव्य पदयात्रा निकाली गई। यह यात्रा जैन मंदिर से प्रारंभ होकर बापचा तिराहा, मुख्य मार्ग और शिव मंदिर से होती हुई पुनः बापचा तिराहा से होकर जैन मंदिर परिसर में संपन्न हुई। पदयात्रा में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग, बच्चे और युवा शामिल हुए, जिन्होंने पैदल चलकर धर्म-आराधना और अहिंसा का संदेश दिया।

यात्रा की विशेषता यह रही कि इसमें भगवान महावीर जैन के मंदिर को विमान रूप में सजाकर नगर में भ्रमण कराया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

पर्यूषण पर्व, जैन धर्म का प्रमुख पर्व है जिसे दशलक्षण पर्व भी कहा जाता है। श्वेतांबर संप्रदाय इसे 8 दिन और दिगंबर संप्रदाय 10 दिन तक मनाते हैं। इस वर्ष यह पर्व 28 अगस्त से प्रारंभ होकर 6 सितंबर तक मनाया जा रहा है। इसका शाब्दिक अर्थ है— आत्मा में अवस्थित होना। पर्व का मुख्य उद्देश्य आत्मशुद्धि, संयम और तपस्या के माध्यम से जीवन को निर्मल बनाना है।
जैन समाज के मोनू जैन ने बताया कि दशलक्षण धर्म को दस रूपों में विभाजित किया गया है— उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन और उत्तम ब्रह्मचर्य।

शुभम जैन ने कहा कि इस पर्व का मुख्य संदेश क्षमा है। वर्षभर में वाणी, कर्म या व्यवहार से किसी को कष्ट पहुँचा हो तो इस अवसर पर "मिच्छामि दुक्कडम्" कहकर क्षमा माँगी और दी जाती है। यही आत्मशुद्धि और सामाजिक समरसता का श्रेष्ठ मार्ग है।
जैन समुदाय के लिए अनंत चतुर्दशी दशलक्षण पर्व का समापन दिवस है। यह दिन आत्मा के अनंत गुणों, तपस्या, क्षमा और संयम के महत्व पर जोर देता है। साथ ही, इसे 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य के मोक्ष (निर्वाण) दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन जैन अनुयायी विशेष पूजन, स्वाध्याय और तपस्या कर धर्मलाभ प्राप्त करते हैं।

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