विवादों में पोहरी तहसीलदार निशा भारद्वाज, मूल निवासी प्रमाण पत्र आवेदन पर मचा बवालआवेदक ने एसडीएम को की प्रथम अपील, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

पोहरी, दतिया। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आमजन को प्रशासनिक सेवाएं सरलता से उपलब्ध कराने हेतु शुरू की गई लोक सेवा गारंटी योजना इन दिनों खुद अधिकारियों की कार्यशैली के चलते विवादों में घिरती जा रही है। ऐसा ही एक मामला पोहरी तहसीील के तहसीलदार निशा भारद्वाज को लेकर सामने आया है, जिन्होंने एक स्थानीय नागरिक का मूल निवासी प्रमाण पत्र आवेदन यह कहकर निरस्त कर दिया कि समग्र आईडी पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई थी।

हालांकि, इस मामले में आवेदक ने न केवल एसडीएम कार्यालय में प्रथम अपील दर्ज कर दी है, बल्कि सोशल मीडिया पर तहसीलदार द्वारा दी गई सफाई पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सोशल मीडिया पोस्ट में तहसीलदार निशा भारद्वाज ने लिखा —

> "आवेदक द्वारा समग्र आईडी MP ई-डिस्ट्रिक्ट पर अपलोड नहीं किया गया है। जब भी आवेदक आवेदन करता है तब ऑनलाइन आवेदन करते समय समग्र मांगता है, परन्तु समग्र आधार से लिंक है या नहीं, इसकी जानकारी अधिकारी को अपलोड समग्र देखकर होती है, जो कि इनके आवेदन में नहीं था।"



इस पर आवेदक ने पलटवार करते हुए लिखा —

> "मुझे आप इतना बताएं कि क्या बिना समग्र आईडी के आवेदन करना संभव है? दूसरी बात, मेरा समग्र भी अपलोड था और आधार से लिंक भी है। उसके बाद भी आवेदन निरस्त करना न केवल अनुचित है, बल्कि नागरिक अधिकारों का हनन है।"

इस प्रकरण ने एक बार फिर प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस की बात करने वाली सरकार के अधिकारी जब मूलभूत दस्तावेजों की सत्यता बिना समुचित जांच के नकारते हैं, तो यह न केवल नागरिकों की परेशानी बढ़ाता है, बल्कि सिस्टम पर सवाल भी खड़े करता है।

सूत्रों के अनुसार, यह मामला अब एसडीएम  से लेकर प्रभारी मंत्री तक पहुँच चुका है और यदि जांच में आवेदक की बात सही पाई जाती है, तो तहसीलदार पर विभागीय कार्रवाई भी संभव है।

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