गो-संरक्षण एवं संवर्धन में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य — मंत्री लखन पटेल

भोपाल, 9 अगस्त — पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने कहा है कि गो-संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस दिशा में तेज गति से कार्य हो रहा है, जिससे गो-वंश का संरक्षण, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और पशुपालकों को आर्थिक सशक्तिकरण मिल रहा है।

श्री पटेल गुरुवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश गो-संवर्धन बोर्ड और राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम की बैठक में विभागीय गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव, सचिव श्री सत्येंद्र सिंह, बोर्ड एवं निगम के प्रबंध संचालक सहित संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

मंत्री पटेल ने बताया कि प्रदेश में स्वावलंबी गो-शालाओं की स्थापना पर तेजी से कार्य हो रहा है। अब तक 28 स्थान चिन्हित कर 8 स्वयंसेवी संस्थाओं को भूमि आवंटित की जा चुकी है। 5000 या अधिक गोवंश के पालन पर शासन द्वारा 130 एकड़ तक भूमि देने का प्रावधान है। इस वित्त वर्ष में चारा-भूसा अनुदान के तहत गौशालाओं को ₹133.35 करोड़ दिए गए हैं, जबकि पिछले वर्ष ₹270.40 करोड़ का अनुदान दिया गया था। राशि में दोगुनी वृद्धि कर अब प्रति पशु ₹40 प्रतिदिन किया गया है।

प्रदेश में वर्तमान में 2942 पंजीकृत गौशालाएं हैं, जिनमें से 2828 संचालित हैं और 4 लाख 22 हजार गो-वंश का पालन हो रहा है। पिछले एक वर्ष में 623 नई गौशालाएं पंजीकृत हुई हैं, जिनमें 596 मनरेगा योजना और 27 स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित हैं। मंत्री पटेल ने निर्देश दिए कि गौशालाओं में बिजली, पानी और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।

उन्होंने सभी गो-वंश की टैगिंग अनिवार्य करने के निर्देश दिए, जिसमें गौशालाओं और निराश्रित गो-वंश के लिए अलग-अलग रंग के टैग होंगे। इसके लिए एक विशेष चिप विकसित की गई है, जिससे हर गो-वंश की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी।

बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना 14 जिलों में संचालित है, जिसमें बैगा, सहरिया और भारिया जनजाति के पशुपालकों को 90% अनुदान पर दो-दो मुर्रा भैंस या गाय दी जाती है। पिछले वित्त वर्ष में 639 हितग्राही लाभान्वित हुए, जबकि इस वर्ष 483 को लाभ देने का लक्ष्य है।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चल रहा है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 1500 "मैत्री" की स्थापना के लिए ₹12.15 करोड़ की राशि मिली है, और चयन प्रक्रिया जारी है।

श्री पटेल ने कहा कि प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार कार्यक्रमों के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है।


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