श्री पटेल गुरुवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश गो-संवर्धन बोर्ड और राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम की बैठक में विभागीय गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव, सचिव श्री सत्येंद्र सिंह, बोर्ड एवं निगम के प्रबंध संचालक सहित संबंधित अधिकारी मौजूद थे।
उन्होंने सभी गो-वंश की टैगिंग अनिवार्य करने के निर्देश दिए, जिसमें गौशालाओं और निराश्रित गो-वंश के लिए अलग-अलग रंग के टैग होंगे। इसके लिए एक विशेष चिप विकसित की गई है, जिससे हर गो-वंश की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी।
बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना 14 जिलों में संचालित है, जिसमें बैगा, सहरिया और भारिया जनजाति के पशुपालकों को 90% अनुदान पर दो-दो मुर्रा भैंस या गाय दी जाती है। पिछले वित्त वर्ष में 639 हितग्राही लाभान्वित हुए, जबकि इस वर्ष 483 को लाभ देने का लक्ष्य है।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चल रहा है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 1500 "मैत्री" की स्थापना के लिए ₹12.15 करोड़ की राशि मिली है, और चयन प्रक्रिया जारी है।
श्री पटेल ने कहा कि प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार कार्यक्रमों के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है।




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