कैसे सामने आया घोटाला?
यह धोखाधड़ी तब उजागर हुई, जब EOW मुख्यालय भोपाल को शिकायत मिली। सत्यापन के बाद प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात की पुष्टि हुई। जांच में पता चला कि बैंक का लिपिक मोहित गुप्ता इस घोटाले का मास्टरमाइंड है।
डोरमेंट अकाउंट्स से निकाले पैसे
मोहित गुप्ता ने अपनी पद और कार्मिक आईडी का दुरुपयोग कर बैंक के 11 डोरमेंट (निष्क्रिय) खातों को निशाना बनाया। इन खातों से उसने लगभग 85.46 लाख रुपए की राशि धोखे से अपने और परिचितों के खातों में ट्रांसफर कर दी।
आरोपियों के नाम
इस मामले में मोहित गुप्ता के साथ उसके सहयोगियों की भी संलिप्तता सामने आई है। EOW ने अब तक सौरभ सेंगर, नरेंद्र सिंह सेंगर, देवराज सिंह, गजेंद्र सिंह सेंगर और मुकेश कुमार सबनानी सहित कुल छह आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
दर्ज हुए मामले
आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा:
420 (धोखाधड़ी)
409 (आपराधिक विश्वासघात)
120 बी (आपराधिक साजिश)
साथ ही, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 13 (1डी) और 13 (2) के तहत भी प्रकरण दर्ज किया गया है।
आगे की कार्रवाई
EOW अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




0 टिप्पणियाँ