भोपाल। चुनाव पूर्व वादों और समाजिक कल्याण के नाम पर शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा बनाए गए 14 सामाजिक कल्याण बोर्ड अब विवादों के घेरे में आ गए हैं। इन बोर्डों के लिए दो वर्षों में करीब 56 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन एक भी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू नहीं हो सका। नतीजा यह है कि अब खुद बोर्डों के अध्यक्ष और सदस्य सरकार के सामने कार्यकाल बढ़ाने और फंड जारी करने की मांग कर रहे हैं।
बिना काम के खर्च, बिना मंजूरी के योजनाएं
सरकार ने दावा किया था कि समाजों के पारंपरिक हुनर के अनुसार उन्हें प्रशिक्षण दिलाया जाएगा और रोजगार से जोड़ा जाएगा। लेकिन दो साल बीतने के बावजूद किसी योजना को स्वीकृति नहीं मिली। कई बोर्डों ने अपने-अपने समाज के पारंपरिक कार्यों को लेकर प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजे, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रमुख बोर्डों का कार्यकाल खत्म
अप्रैल 2025 में ही चार बोर्डों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, जिनमें विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड, रजक समाज कल्याण बोर्ड, स्वर्णकला माटी बोर्ड और तेलघानी बोर्ड शामिल हैं। शेष बोर्डों का कार्यकाल भी मई से अक्टूबर 2025 के बीच समाप्त होने जा रहा है।
बोर्ड अध्यक्षों की नाराजगी
नारायण सिंह कुशवाह (मप्र कुश समाज कल्याण बोर्ड): “हमने शासन को प्रोजेक्ट बनाकर दिया, लेकिन अभी तक कोई मंजूरी नहीं मिली। स्वीकृति मिले तो प्रशिक्षण शुरू किया जा सकता है।”
प्रेम नारायण विश्वकर्मा (मप्र विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड): “हमने अपने समाज के पारंपरिक कार्यों को लेकर योजना बनाई, लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई।”
फर्नीचर और गाड़ियों पर खर्च, लेकिन योजनाएं ठप
हैरत की बात यह है कि जिन बोर्डों के कार्यकाल खत्म हो चुके हैं, उनके लिए भी शासन स्तर पर नया फर्नीचर और वाहन खरीदे जा रहे हैं, लेकिन प्रशिक्षण के लिए कोई फंड जारी नहीं किया गया।
एमपी स्टेट स्किल डेवलपमेंट बोर्ड की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर गिरीश शर्मा, संईओ (एमपी स्टेट स्किल डेवलपमेंट बोर्ड) ने कहा, “बोर्डों से जो प्रस्ताव मिले हैं, उन्हें शासन को भेजा गया है। मंजूरी मिलने पर ट्रेनिंग शुरू की जाएगी।”




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