नरसिंहपुर में पत्रकारिता पर हमला: जनहित की कलम को कुचलने की साजिश?"ब्रजेश दीक्षित पर फिर हमला, सट्टा माफिया के हौसले बुलंद, पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में

नरसिंहपुर। नरसिंहपुर जिले में पत्रकारिता की आवाज को दबाने की कोशिशें थमने का नाम नहीं ले रहीं। वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश दीक्षित पर सट्टा माफियाओं द्वारा दूसरी बार जानलेवा हमला किया गया है। यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि सच बोलने की आज़ादी पर सीधा हमला है।

7 महीने पहले आमगांव क्षेत्र में सक्रिय सट्टा माफिया मुन्ना सिसोदिया का धंधा उजागर कर बंद करवाने वाले ब्रजेश दीक्षित, अब फिर उसी साजिश का शिकार बने हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बार हमले में स्थानीय पुलिस की संलिप्तता भी उजागर हो रही है, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

हमले के बाद करेली टीआई प्रियंका केवट ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज की। चार नामजद आरोपियों—राजेंद्र सिसोदिया उर्फ बड़ा मुत्रा, अशोक सिसोदिया उर्फ छोटा मुन्ना, राजा सिसोदिया और मोंटी चंदेल—के विरुद्ध धारा 324 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। लेकिन पत्रकारों का कहना है कि ये धारा इतनी कमजोर है कि माफियाओं को जल्द ही राहत मिल सकती है।

"मुख्यमंत्री मोहन यादव जी, अगर प्रदेश में सट्टा और जुए को खुली छूट देनी है, तो पत्रकारों को लिखना बंद करने का आदेश दे दीजिए,"—यह तीखा बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

कल, 12 अप्रैल को दोपहर 1 बजे नरसिंहपुर सर्किट हाउस में जिले के वरिष्ठ पत्रकारों की एक आपात बैठक बुलाई गई है, जिसमें प्रशासनिक निष्क्रियता और पत्रकार सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

अब सवाल उठता है:

क्या सच लिखना अब अपराध है?

क्या माफियाओं को बेनकाब करना अब जान का जोखिम बन गया है?

और क्या पुलिस अब अपराधियों की ढाल बन चुकी है?

आज नरसिंहपुर ही नहीं, पूरे मध्यप्रदेश के पत्रकारों में जबरदस्त आक्रोश है। अगर इस बार भी प्रशासन ने चुप्पी साधी, तो यह चुप्पी लोकतंत्र को शर्मसार कर देगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ