इंदौर। शहर के आसपास खेतों में पराली जलाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इसकी वजह से इंदौर के घरों की छतों तक जले हुए भूसे का कचरा पहुंच रहा है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद किसान पराली जलाना नहीं छोड़ रहे हैं। अब तक जिले में 13 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और 15 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया है।
इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए "अन्नदाता मिशन (कृषक कल्याण मिशन)" की शुरुआत की है। इस योजना के तहत जो किसान पराली न जलाने समेत पांच शर्तों को पूरा करेंगे, उन्हें प्रति एकड़ 1500 रुपये से 3000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
सरकार की इस नई योजना का उद्देश्य किसानों को जलवायु अनुकूल खेती की ओर प्रोत्साहित करना और उनकी आय बढ़ाना है। कैबिनेट मीटिंग में इस योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी जा चुकी है और इसे 2028 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। खासकर 2.69 लाख वनाधिकार पट्टाधारी किसानों को इस योजना का सीधा लाभ देने की तैयारी है।
योजना की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:
1. पराली जलाने से मुक्त खेती को अपनाना।
2. कृषि लोन का समय पर भुगतान करना।
3. कीटनाशकों का कम उपयोग करते हुए जैविक खेती को बढ़ावा देना।
4. तिलहन व दलहन की खेती को प्राथमिकता देना।
5. ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक सिंचाई पद्धति अपनाना।
अधिकारियों के अनुसार, जो किसान पहले से पीएम किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत सालाना 12 हजार रुपये पा रहे हैं, वे इन शर्तों को पूरी कर अतिरिक्त 3 हजार रुपये तक का इंसेंटिव भी हासिल कर सकते हैं।
प्रशासनिक सख्ती भी जारी:
अब तक जिले के कनाडिया, मल्हारगंज, खुड़ैल, राऊ, महू, सांवेर और देपालपुर क्षेत्रों में 13 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही अर्थदंड भी वसूला जा रहा है। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर "कृषक संवाद कार्यक्रम" के जरिए किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और वैकल्पिक उपायों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
सरकार की इस नई पहल से उम्मीद की जा रही है कि किसान पराली जलाने की जगह अब अधिक जिम्मेदार और पर्यावरण अनुकूल तरीके से खेती करेंगे।




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