30 दिन में जानकारी नहीं देने पर तीन अफसरों पर जुर्माना 2 पर 15-15 और एक पर 25 हजार रुपए के जुर्माना


Bhopal । राज्य सूचना आयुक्त विजय मनोहर तिवारी ने तीन लोक सूचना अधिकारियों को क्रमशः 15-15 और 25 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है । इन्हें समय पर निर्णय न लेने और बार - बार सूचित किए जाने के बावजूद देने योग्य जानकारी के प्रकरण अटकाने का दोषी पाया गया । एक अधिकारी ने अपने बचाव में कहा कि उन पर काम का दबाव ज्यादा है । एक अधिकारी ने 30 दिन का महत्वपूर्ण समय अनिर्णय की स्थिति में जाने दिया और एक प्रकरण में न 30 दिन में निर्णय लिया , न प्रथम अपीलीय आदेश का पालन किया और आयोग के आदेश का भी पालन नहीं किया । तीनों प्रकरणों में अधिकारियों को दंडित किया गया ।

 प्रथम केस में अनूपपुर में जैतहरी नगर पालिका के लोक सूचना अधिकारी भूपेंद्र सिंह पर 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है । आवेदक नौशाद खान ने साल 2021 में पदोन्नत हुए कर्मचारियों से संबंधित जानकारियां चाहीं थीं । न तो उन्हें 30 दिन में जानकारी मिली , न प्रथम अपीलीय आदेश के बाद कोई जवाब तक नहीं दिया गया । आयोग के आदेश का भी पालन नहीं किया गया तो प्रकरण पुनः शिकायत में लौटा । आयोग ने उन्हें धारा 20 ( 1 ) के तहत पहले कारण बताओ सूचना पत्र दिया और विधिसम्मत उत्तर न मिलने पर जुर्माना लगाया ।

द्वितीय केस- 2 - सागर में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के लोक सूचना अधिकारी बीएल मालवीय को एक प्रकरण में यथासमय निर्णय न लेने और प्रकरण को अनावश्यक टाले रखने के लिए 25 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया । आवेदक राकेश तिवारी ने चार बिंदुओं पर आत्मा परियोजना से संबंधित दस सालों की जानकारी चाही थी । लेकिन 30 दिन का कीमती समय प्रकरण को टाले रखने में नष्ट कर दिया । आवेदन के स्वरूप पर अपने निर्णय में आयोग ने टिप्पणी की कि जटिल , अतिविस्तृत और अस्पष्ट जानकारी की मांग के आवेदनों में यह गुंजाइश रहती है कि प्राप्त जानकारी से आवेदक संतुष्ट नहीं होते और यह शिकायत बनी ही रहती है ।

 तृतीय केस -3 टीकमगढ़ में पलेरा के कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के सम लोक सूचना अधिकारी अवध बिहारी दुबे को एक प्रकरण में कई बार सूचित किए जाने के बावजूद जानकारी नहीं देने का दोषी पाकर 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया । आवेदक पप्पू राय ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को कोविड काल में दिए गए सूखे राशन का रिकॉर्ड मांगा था । लोक सूचना अधिकारी द्वारा संबंधित शाखा प्रमुख को दो बार पत्र लिखकर रिकॉर्ड मांगा गया । जब कोई जानकारी नहीं मिली तो प्रथम अपीलीय अधिकारी को इस बारे में अवगत कराया गया । सम लोक सूचना अधिकारी के रूप में अवध बिहारी दुबे को तलब किया गया । आरटीआई के हर आवेदन में शुरुआती 30 दिन का समय अमूल्य है । एक - एक दिन की उल्टी गिनती है । हर जानकारी देने योग्य ही हो ये भी जरूरी नहीं है , लेकिन जवाब देना जरूरी है । लेकिन कई अधिकारी अभी भी प्रकरणों को टाले रखने की आदत से मजबूर हैं । धारा 20 ऐसे ही अधिकारियों के लिए अर्थदंड का निर्णय निश्चित करती है ।
 -विजय मनोहर तिवारी , राज्य सूचना आयुक्त

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