लटेरी एसडीएम कोर्ट की सख्ती: बेटों को देना होगा भरण-पोषण, अतिक्रमण हटाकर बुजुर्गों को दिलाई राहत



लटेरी विदिशा, 12 अप्रैल 2026। वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए लटेरी एसडीएम न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन मामलों में त्वरित कार्रवाई कर राहत प्रदान की है। मध्यप्रदेश माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 के तहत हुई सुनवाई में कहीं अतिक्रमण हटाया गया तो कहीं बेटों को मासिक भरण-पोषण देने के आदेश जारी किए गए।

अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) लटेरी नितिन जैन ने बताया कि ग्राम मुरवास की आशा बी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पुत्र अब्दुल हफीज खां ने उनकी भूमि पर कब्जा कर उन्हें बेदखल कर दिया है और भरण-पोषण भी नहीं कर रहा। न्यायालय ने 19 सितंबर 2024 को आदेश जारी कर अतिक्रमण हटाने और प्रति माह 2000 रुपये भरण-पोषण देने के निर्देश दिए। तहसीलदार और पटवारी की कार्रवाई से भूमि का कब्जा पुनः दिलाया गया। बाद में राशि न देने पर जेल वारंट जारी हुआ, जिसके बाद आरोपी ने 7 मार्च 2026 को 3000 रुपये जमा कर दिए और मामला निराकृत हुआ।

दूसरे प्रकरण में ग्राम धर्मकांटे के 74 वर्षीय लालाराम कुशवाह ने अपने पुत्रों पर धमकाने और भरण-पोषण न करने का आरोप लगाया। 9 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में आपसी सहमति से समझौता हुआ। पांचों पुत्रों ने माता-पिता को प्रति माह एक-एक हजार रुपये देने पर सहमति जताई। साथ ही लालाराम ने भूमि का एक हिस्सा पुत्रों को कुटीर निर्माण हेतु दानपत्र के माध्यम से देने का निर्णय लिया।

तीसरे मामले में ग्राम कुंडलपुर की दयालोबाई अहिरवार ने पुत्रों पर फर्जी नामांतरण और मारपीट कर घर से निकालने का आरोप लगाया है। न्यायालय ने नोटिस जारी कर 23 अप्रैल 2026 को अगली सुनवाई तय की है।

एसडीएम न्यायालय की इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और संपत्ति अधिकारों को लेकर प्रशासन संवेदनशील है और शिकायत मिलने पर त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जा रहा है। 

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