लटेरी। तहसील लटेरी में शासकीय विद्यालयों की स्थिति चिंताजनक नजर आ रही है। विभिन्न स्कूलों के निरीक्षण में सामने आया कि कहीं शिक्षक अनुपस्थित मिले तो कहीं बच्चे ही स्कूल नहीं पहुंचे। कई स्थानों पर विद्यालय परिसर का उपयोग अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
तहसील के शासकीय प्राथमिक शाला खूदरामपुर में न तो बच्चे मिले और न ही शिक्षक। विद्यालय परिसर में एक किसान अपने धनिया की सफाई करते हुए मिला। इससे स्कूल संचालन पर प्रश्नचिह्न लग गया।
वहीं शासकीय प्राथमिक माध्यमिक शाला कलादेव में पदस्थ 8 शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थीं, लेकिन दोपहर 3:10 बजे तक एक भी बच्चा स्कूल में नहीं मिला। कक्षाओं में ताले लगे थे और पूरा परिसर गौशाला में तब्दील दिखाई दिया। सबसे आश्चर्यजनक बात यह रही कि स्कूल से मात्र 10 कदम की दूरी पर मुर्दाघर बना हुआ है और विद्यालय में बाउंड्रीवाल भी नहीं है।
बरखेड़ा देव स्कूल में 7-8 बच्चे अकेले कक्षा में बैठे पढ़ाई करते मिले। वहीं देवेन्द्र मालवीय, हरीशंकर अहिरवार, सुनील कुशवाहा और फूल सिंह प्रजापति सहित अतिथि शिक्षक एक कक्ष में बैठे थे। कक्षाओं का संचालन भगवान भरोसे चल रहा था।
जरसेना स्कूल का भवन बाहर से आकर्षक दिखाई दिया, लेकिन वहां भी गेट पर ताले लगे मिले और परिसर गौशाला बना हुआ था। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षक समय से पहले ही हाजिरी लगाकर घर चले जाते हैं। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल रही है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इन स्कूलों की स्थिति लटेरी के सांदीपनि विद्यालय से भी बदतर हो सकती है, जहां 328 में से केवल 87 बच्चे ही पास हुए थे। जब प्राथमिक स्तर पर ही बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो आगे की शिक्षा पर इसका सीधा असर पड़ना तय है।
क्षेत्रवासियों ने शिक्षा विभाग से तत्काल जांच कर कार्रवाई की मांग की है, तकि विद्यालयों में नियमित पढ़ाई सुनिश्चित हो सके और बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके। इस पूरे मामले को लेकर विकासखंड अधिकारी पुष्पेंद्र वर्मा ने जांच कराकर उचित कार्रवाई करने की बात की है।




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