तीतरवर्री में सचिव नदारद | एक ही जर्जर भवन में पंचायत, आंगनबाड़ी और स्कूल संचालित

जर्जर पंचायत भवन में पढ़ाई और पोषण दोनों दांव पर

तीतरवर्री में सचिव नदारद, एक ही भवन में पंचायत, आंगनबाड़ी और स्कूल संचालित

लटेरी आनंदपुर। ग्राम पंचायत तीतरवर्री में शासन की व्यवस्थाएं जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रही हैं। पंचायत भवन रोज खुलता है, लेकिन पंचायत सचिव गजराज सिंह महीने में एक-दो बार ही गांव पहुंचते हैं। इसका सीधा असर पंचायत के कामकाज पर पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों और शिकायतों के लिए भी आनंदपुर और लटेरी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अब स्थिति और गंभीर इसलिए हो गई है क्योंकि इसी जर्जर पंचायत भवन में बच्चों की पढ़ाई और पोषण दोनों संचालित किए जा रहे हैं।
एक ही भवन में पंचायत, आंगनबाड़ी और स्कूल
हैरानी की बात यह है कि इसी पंचायत भवन में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किया जा रहा है। वहीं स्कूल की इमारत क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिसके चलते छोटे-छोटे बच्चों की कक्षाएं भी इसी पंचायत भवन में लगाई जा रही हैं। यानी एक ही जर्जर भवन में पंचायत कार्यालय, आंगनबाड़ी और स्कूल—तीनों व्यवस्थाएं किसी तरह चलाई जा रही हैं।

ग्रामीण का आरोप: सचिव कभी गांव नहीं आते

ग्राम के निवासी मोहन सिंह रघुवंशी ने बताया कि पंचायत सचिव गांव में लगभग कभी आते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हमने पंचायत भवन में कई बार देखा है कि यहां कभी-कभार सिर्फ आंगनबाड़ी और स्कूल के कर्मचारी ही मौजूद रहते हैं। सचिव तो महीनों दिखाई नहीं देते। काम कराने के लिए हमें बाहर जाना पड़ता है।” 
ग्रामीणों का कहना है कि सचिव की गैरमौजूदगी में पंचायत भवन सिर्फ नाम का रह गया है।

मंगलवार की जनसुनवाई सिर्फ रजिस्टरों तक सीमित

शासन के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में मंगलवार को जनसुनवाई अनिवार्य है, लेकिन तीतरवर्री में यह व्यवस्था केवल फाइलों और रजिस्टरों तक ही सीमित है। ग्राम स्तर पर न तो जनसुनवाई होती है और न ही समस्याओं का समाधान। मजबूरी में ग्रामीणों को अपनी शिकायतें लेकर लटेरी जनसुनवाई में जाना पड़ता है।

जर्जर दीवारें, बच्चों पर मंडरा रहा खतरा

तीतरवर्री पंचायत भवन की दीवारें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। दीवारों में बड़े-बड़े क्रैक पड़ चुके हैं और कब गिर जाएं, इसका कोई भरोसा नहीं। हालात और भी चिंताजनक इसलिए हैं क्योंकि पंचायत भवन की दीवारों को ही मूत्रालय के रूप में उपयोग किया जा रहा है। लगातार मूत्र और गंदगी के कारण दीवारों में नमी भर चुकी है। कई जगह से प्लास्टर गिर चुका है और दीवारें बाहर की ओर उभर आई हैं।
इसी भवन में आंगनबाड़ी के नन्हे बच्चे और स्कूल के छात्र-छात्राएं रोजाना पढ़ने आते हैं। जर्जर दीवारों और गंदगी के बीच बच्चों को बैठाकर पढ़ाना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। अभिभावकों में हमेशा डर बना रहता है कि कहीं कोई दुर्घटना न हो जाए।

ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत सचिव की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ग्राम पंचायत में वास्तविक रूप से जनसुनवाई आयोजित हो, आंगनबाड़ी और स्कूल के लिए सुरक्षित वैकल्पिक भवन की व्यवस्था की जाए तथा जर्जर पंचायत भवन की तत्काल मरम्मत कराई जाए। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर स्थिति पर कब संज्ञान लेंगे और तीतरवर्री के बच्चों व ग्रामीणों को कब सुरक्षित और सुचारू व्यवस्थाएं मिलेंगी।

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