अनुविभागीय अधिकारी के निर्देश के बाद भी मंडी टीनशेड पर व्यापारियों का अवैध कब्जा कौन जिम्मेदार

आनंदपुर उपमंडी में नियम कागज़ों में, ज़मीन पर मनमानी

आनंदपुर । उपमंडी इन दिनों अव्यवस्थाओं का केंद्र बनी हुई है। मंडी परिसर में व्यापारी लाइसेंस संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की गई है। इसका फायदा उठाकर बिना लाइसेंस वाले व्यापारी, लाइसेंसधारी व्यापारियों की मिलीभगत से धड़ल्ले से खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। इस अनियमित व्यवस्था के चलते मंडी में बार-बार विवाद की स्थिति बन रही है, जिसका खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

मंडी में व्यापारियों द्वारा तीन सेटों के नीचे अतिक्रमण कर हजारों क्विंटल मक्का फैला दी गई है। बताया जा रहा है कि यह सब मंडी सचिव की जानकारी और सहमति से हो रहा है। टीनशेड के नीचे मक्का फैले होने से मंडी में फसल लेकर पहुंचने वाले किसानों को अपने ट्रैक्टर लगाने तक की जगह नहीं मिल पा रही है। किसानों का आरोप है कि मंडी की जगह व्यापारियों का गोदाम बनती जा रही है।

बुनियादी सुविधाओं की हालत भी चिंताजनक है। मंडी में पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। जर्जर पानी की टंकी से कई स्थानों पर पानी बह रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों और मजदूरों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। पानी को लेकर सवाल उठाने पर मंडी सचिव ने पहले स्थिति को नकारा, लेकिन बाद में गलती मानते हुए टंकी सुधारने का आश्वासन दिया।
पिछले एक सप्ताह पहले ही आनंदपुर उपमंडी में व्यापारियों के आपसी विवाद के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। नाराज किसानों ने सड़क पर चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद एसडीएम नितिन जैन ने मंडी का निरीक्षण कर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मंडी परिसर में किसी भी व्यापारी द्वारा अनाज नहीं रखा जाएगा। बावजूद इसके आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है और टीनशेड के नीचे अतिक्रमण जारी है।

मंडी सचिव का तर्क है कि फैलाई गई मक्का ताजा खरीदी गई है और शीघ्र ही ट्रकों के माध्यम से बाहर भेज दी जाएगी। लेकिन लगातार नजर आ रहे अतिक्रमण से यह स्पष्ट होता है कि व्यापारियों को प्रशासनिक आदेशों की परवाह नहीं है। इससे पहले भी एसडीएम द्वारा अवैध कब्जे के मामले में दो व्यापारियों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
कुल मिलाकर आनंदपुर उपमंडी में प्रशासनिक आदेश और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है। किसानों की मांग है कि मंडी सचिव की भूमिका की जांच हो, अवैध अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए और मंडी में पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि किसान बिना किसी बाधा के अपनी उपज बेच सकें।
इन सारी समस्याओं को लेकर जिला मंडी सचिव नीलकमल वैघ से उनके मोबाइल 7869866062 पर संपर्क किया गया तो उनके द्वारा फोन ही रिसीव नहीं किया गया इसके बाद हमने मंडी बोर्ड की संयुक्त सचालक संगीता ढोके को उनके संपर्क नंबर 94250-65217 पर समस्या से अवगत कराना चाहा तो उनके द्वारा भी हमारा कॉल रिसीव नहीं किया गया इससे साफ जहिर होता है मंडी बोर्ड के अधिकारी कर्मचारी भी अवस्था और निगरानी के लिए जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं जिससे खामियाजा शासन एवं आम नागरिकों और किसानों को भुगतना पड़ रहा है हालांकि इस पर हमारी निगरानी बनी रहेगी देखते हैं खबर के बाद 
अधिकारी  इस मामले पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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