निरीक्षण में उजागर हुई शिक्षा तंत्र की लापरवाही
आनंदपुर/ जावती 2 सितम्बर, हाई स्कूल जावती कहने को तो जन शिक्षा केंद्र है लेकिन जन शिक्षा केंद्र पर ही शिक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही देखी गई शासकीय हाईस्कूल जावती में निरीक्षण के दौरान शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियाँ सामने आई.
विद्यालय में पंजीकृत बच्चों की तुलना में उपस्थिति बेहद कम पाई गई, वहीं शासन से प्राप्त पुस्तकें अव्यवस्थित और बिखरी पड़ी मिलीं. लागतार आधे दिन बाद ही बच्चों का स्कूल छोड़ कर चले जाने को मिला रही थी दी शपथ (Theshapath News) की टीम के निरीक्षण के बाद बच्चों की स्कूल में उपस्थित्ति की हकीकत आई सामने दी शपथ (Theshapath News) की टीम जब विद्यालय पहुंची तो कक्षाओं में बच्चों की स्थिति में पहला कदम चौंकाने वाली थी.
कक्षा 1-2 में पंजीकृत बच्चों की संख्या 41 है जिसमें उपस्थित केवल 10 मिले. वहीं कक्षा 3 व 4 पंजीकृत बच्चों की संख्या 44 है जिसमें उपस्थित मात्र 5 मिले तथा कक्षा 5 में पंजीकृत 42 हैं, निरीक्षण के समय काफी विद्यार्थी अनुपस्थित मिले.
इसी तरह कक्षा 6,7, 8 में बच्चों की उपस्थिति न मिलने को जानकारी शिक्षिका से लक्ष्मी पथीं से पूछा गया तो शिक्षिका जानकारी बता नहीं सकी और हाईपर होने लगी. इस विषय पर प्राचार्य गजराज सिंह मीना से पूछा गया तो पहले तो उनके द्वारा गुमराह किया गया कि बच्चे कक्षा में ही उपस्थित हैं. जब प्राचार्य से कहा गया की चलिये हमको कक्षा 6,7,8 देखना हैं तो कितने बच्चें है लेकिन कक्षा में देखने के बाद
प्राचार्य द्वारा कही गई बात गलत पाई गई बच्चे क्लास रूम में बैठे है बाद में टीम ने प्राचार्य गजराज सिंह से बच्चों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि आज हॉकी जादूगर मेजर ध्यानचंद को 120वीं जयंती है तो बच्चें खेल के बाद घर चले गए होंगे. फिर हमनें पूछा की ऐसा कोई आदेश है की हाँकी जादूगर मेजर ध्यानचंद की 120वीं जयंती मानने या हाफ के होने के बाद बच्चे घर जा सकते है या बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है. तो प्राचार्य ने कहा ऐसा कोई आदेश या नियम नहीं है जिन कक्षाओं में बच्चें नहीं मिले या कम मिले है में शिक्षक/शिक्षिका पर नोटिस कार्यवाही करुगा.
किताबें बिखरी मिलीं
विद्यालय परिसर में शासन द्वारा वितरित पुस्तकें भी अव्यवस्थित और बिखरी हुई मिलीं. इस पर प्रभारी प्राचार्य गजराज सिंह मीना ने कहा कि इसकी जानकारी सीआरसी प्रभारी बृजमोहन शर्मा ही दे सकते हैं.
निरीक्षण के समय मौजूद शिक्षक
विद्यालय में कुल 10 शासकीय शिक्षक शिक्षिकाएँ एवं 3 अतिथि शिक्षक दर्ज हैं. निरीक्षण के समय 4 महिला शिक्षिकाएँ, प्रभारी प्राचार्य तथा दो अन्य शिक्षक एवं एक आईटी का शिक्षक मौजूद पाए गए,
प्रभारी प्राचार्य गजराज सिंह मीना ने माना कि बच्चे आते हैं, लेकिन आज चले गए। नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अधीन 35 विद्यालय आते हैं, किंतु सीआरसी प्रभारी बृजमोहन शर्मा एवं अभय कुमार श्रीवास्तव कभी विद्यालयों का निरीक्षण नहीं करते और न ही उपस्थिति पंजी पर हस्ताक्षर करते हैं. इस लापरवाही की लिखित शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों को की जा चुकी है.
प्राचार्य ने बताया कि शनिवार को जावती हाईस्कूल में जनशिक्षा केंद्र स्तरीय एक दिवसीय संवाद आयोजित होना था. यह कार्यक्रम हॉकी जादूगर मेजर ध्यानचंद को 120वीं जयंती को समर्पित था. किंतु सीआरसी प्रभारी बृजमोहन शर्मा ने मनमानी करते हुए इस कार्यक्रम को सुनखेर में आयोजित कर दिया.
व्यवस्था पर उठते हैं सवाल
निरीक्षण में सामने आई खामियों ने शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं. पंजीकृत बच्चों की तुलना में उपस्थिति इतनी कम क्यों है? क्या प्रति दिन ही बच्चों की उपस्थिति की स्थिति कमी है रहतीं हैं. क्या हाफ डे का बहाना विद्यार्थियों को समय से पहले छुट्टी देने का तरीका है? क्या विद्यालय में बच्चों को शिक्षा नहीं मिलती
सीआरसी का कहना
जब दी शपथ के संवाददाता ने सीआरसी ब्रजमोहन शर्मा से जन शिक्षा केंद्र जावती प्राचार्य द्वारा लगाई गए आरोप के विषय में बात की तो पता चला की संकुल प्राचार्य करते है अड़ी बाजी वह चाहते है कि शिक्षकों पर दवाब बनाना अगर उनका कार्य पूरा नहीं होता तो वह बिना बजाए ही शिक्षकों के नोटिस निकलने की धमकी देते है यही कार्य करने का हमसे बोलते है जो की विभाग की दृष्टि से गलत है क्योंकि बिना कोई कारण किसी को परेशान किया जाए ये गलत हैं में चाहता हूं की शिक्षक दवाब फ्री होकर विद्यालय में बच्चों को शिक्षा प्रधान कराएं जो की सही है और रही बात जन शिक्षा केंद्र पर उपस्थिति की तो में रोज बीआरसी ऑफिस में उपस्थित दर्ज करता हूं और ई-अटेंडेंस के माध्यम से भी अपनी उपस्थिति दर्ज करता हूं और मेरा प्रतिदिन दो स्कूलों का भ्रमण का कार्य होता है जो की में अपनी पूरी ईमानदारी एवं जिम्मेदारी से निभाता हूं मेरा फील्डवर्क का जो भी कार्य होता है इसकी पूरी जानकारी मैं अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देता हूं. सीआरसी से जन शिक्षा केंद्र में पड़ी पुस्तको के बारे में पूछा तो सीआरसी ने कहा कि मेरा कार्य विद्यालय में पुस्तक पहुंचने का है जो पुस्तके आपको जावती एकीकृत हाई स्कूल में मिली है वह जावती स्कूल की ही है मेरा काम नहीं पुस्तको को बच्चों को वितरण करने का कार्य विद्यालय का हैं. मेरा नहीं है. जावती हाईस्कूल में दी शपथ (Theshapath News) की टीम द्वारा निरीक्षण के दौरान उजागर हुई ये कमियाँ शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर को सामने लाती हैं. अब सबकी निगाहें विभागीय अधिकारियों पर टिकी हैं कि इस पूरे मामले में वे क्या कदम उठाते हैं




0 टिप्पणियाँ