"बारिश में टपक रही है लोक सेवा केंद्र की छत — क्या मौत का इंतजार कर रहा है प्रशासन?"

आनंदपुर लटेरी । जहां आम जनता सरकारी सुविधाओं के लिए कतार में खड़ी होती है, वहीं लोक सेवा केंद्र की हालत खुद 'सेवा' मांग रही है। बारिश होते ही इस केंद्र की छत टपकने लगती है, फर्श पर पानी भर जाता है, और बिजली के उपकरण जानलेवा खतरे में पड़ जाते हैं।

केंद्र नहीं, संकट का घर बन चुका है लोक सेवा केंद्र!

लोक सेवा केंद्र, जहां ग्रामीणों और नागरिकों को जन्म प्रमाणपत्र से लेकर जाति, आय, निवास जैसे आवश्यक दस्तावेज मिलते हैं, अब खुद अपनी दुर्दशा पर रो रहा है। हालत यह है कि वहां बैठे कर्मचारी सिर पर प्लास्टिक की शीट या बाल्टी रखकर काम कर रहे हैं, और आवेदक फिसलन भरे फर्श पर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

प्रशासन चुप, खतरा चालू

अब सवाल यह उठता है कि आखिर प्रशासन किस दिन का इंतजार कर रहा है?
क्या तब ध्यान जाएगा, जब कोई हादसा हो जाएगा, छत गिरेगी या करंट से किसी की जान जाएगी?
बारिश के मौसम में लोक सेवा केंद्र की हालत सरकारी सिस्टम की असलियत बयां कर रही है।

कर्मचारी भी डरे, जनता भी परेशान

केंद्र में कार्यरत एक कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा है कि वे हर दिन डर के साये में काम कर रहे हैं। न जाने कब ऊपर से प्लास्टर गिर जाए या किसी वायरिंग में शॉर्ट सर्किट हो जाए। वहीं आवेदकों को भी लंबे इंतज़ार के बाद भीगते हुए दस्तावेज लेने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।

कहां है मेंटेनेंस बजट? कहां हैं जिम्मेदार अधिकारी?

सरकारी भवनों की मरम्मत और रखरखाव के लिए हर साल लाखों रुपये का बजट स्वीकृत होता है। सवाल ये है कि उस बजट का क्या हुआ?
क्यों आज तक इस लोक सेवा केंद्र की मरम्मत नहीं हुई?
क्या जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागज़ों में फाइलें घुमाते रहेंगे, या कभी ज़मीनी हकीकत भी देखेंगे?

अब जनता पूछ रही है:

क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?

मेंटेनेंस फंड का उपयोग कब होगा?

कर्मचारियों और जनता की जान से खिलवाड़ कब तक?

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