नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नैनो और बायोस्टिमुलेंट उत्पादों की जबरन टैगिंग को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि परंपरागत उर्वरकों के साथ किसानों को जबरन नैनो या बायोस्टिमुलेंट उत्पाद बेचने की अवैध प्रथा पर तत्काल रोक लगाई जाए।
मंत्री चौहान ने कहा कि ऐसी जबरन टैगिंग न केवल अनैतिक है, बल्कि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के तहत अवैध भी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को चेताया कि यदि कोई वितरक, खुदरा विक्रेता या कंपनी इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ लाइसेंस रद्द, एफआईआर दर्ज करने और अभियोजन की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
क्या है जबरन टैगिंग?
जबरन टैगिंग का तात्पर्य है कि परंपरागत उर्वरक खरीदते समय किसानों को नैनो या बायोस्टिमुलेंट उत्पाद भी लेने के लिए मजबूर किया जाता है, चाहे उनकी ज़रूरत हो या नहीं। इससे किसान अनावश्यक आर्थिक बोझ और भ्रम का शिकार होते हैं।
किसानों के हितों की सुरक्षा प्राथमिकता: चौहान
मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि किसानों के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर कड़ी निगरानी रखें, साथ ही किसानों को जागरूक करें ताकि वे नकली या जबरन बेचे जा रहे उत्पादों की पहचान कर सकें और शिकायत दर्ज करवा सकें।
उन्होंने कृषि विभागों और जिला प्रशासन को जिम्मेदारी से कार्य करने का निर्देश भी दिया, जिससे किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सरकार की मंशा साफ
यह सख्त कार्रवाई सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता, गुणवत्ता और विश्वास बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। मंत्री ने दोहराया कि "किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं के समाधान में कोई भी ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"




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