मध्य प्रदेश का दमोह जिला एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में है, और इस बार वजह है ट्रांसफर नीति का खुलेआम उल्लंघन। जिले में 10 पटवारियों को उनकी गृह तहसील में ही पदस्थ कर दिया गया है, जिससे राज्य की स्थानांतरण नीति 2025 की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं।
स्थानांतरण नीति की अवहेलना
आयुक्त भू अभिलेख, मध्य प्रदेश कार्यालय ग्वालियर ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि कोई भी पटवारी अपनी गृह तहसील में पदस्थ नहीं रह सकता। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 29 अप्रैल 2025 को जारी स्थानांतरण नीति की कंडिका 5 और पटवारी संविलियन नीति की कंडिका 5.2 के अनुसार यह स्पष्ट प्रावधान है, लेकिन दमोह कलेक्टर द्वारा जारी आदेशों में इन नियमों को दरकिनार कर दिया गया।
संशोधित आदेश ने बढ़ाया विवाद
10 जून को प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार की स्वीकृति के बाद जिन पटवारियों को उनकी गृह तहसील दमयंती नगर से अन्य तहसीलों में ट्रांसफर किया गया था, उन्हें 17 जून को संशोधित आदेश जारी कर फिर से दमयंती नगर में ही पदस्थ कर दिया गया। इतना ही नहीं, तीन अन्य पटवारी जो पहले से दमोह ग्रामीण में पदस्थ थे और जिनका ट्रांसफर अन्य तहसीलों में हो चुका था, उन्हें भी वापिस उनकी गृह तहसील में लाकर पदस्थ किया गया।
पटवारी संघ ने जताई नाराजगी
इस निर्णय से राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है। राजस्व कर्मचारी कल्याण संघ ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा है कि यह पूरा मामला SLR और OIC की "विशेष कृपा" का परिणाम है। संघ ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार, राजस्व मंत्री करन सिंह वर्मा, दमोह विधायक जयंत मलैया समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।
क्या होगा आगे?
दमोह जिले में ट्रांसफर नीति के खुले उल्लंघन ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या राज्य शासन इस मामले में कोई कड़ा कदम उठाता है या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।




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