मामला मध्य प्रदेश के सेवा शर्तों से जुड़ा है, जहाँ सरकार की एक नीति है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी तीसरी संतान के जन्म के बाद नौकरी में आता है या तीसरी संतान होने के बाद भी सेवा में रहता है (विशेषकर नियुक्ति के बाद), तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है।
शुभम सोनी भोपाल मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में एक सरकारी महिला शिक्षक की तीसरी संतान होने के बाद सेवा समाप्ति के मामले ने पूरे राज्य में सरकारी शिक्षकों के बीच हड़कंप मचा दिया है।
धमौरा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ टीचर रंजीता साहू पर आरोप था कि उन्होंने तीसरी संतान होने की जानकारी छुपाकर सरकारी नौकरी का लाभ उठाया।
संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, भोपाल संभाग द्वारा आदेश जारी कर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
मामले की मुख्य बातें:
महिला टीचर रंजीता साहू पर आरोप है कि उन्होंने तीसरी संतान होने के बाद भी सरकारी नौकरी का लाभ लिया।
भोपाल के संयुक्त संचालक कार्यालय की ओर से उनकी सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया गया है।
शिकायत मिलने के बाद विभागीय जांच हुई और जुलाई 2023 में उन्हें आरोप पत्र (शो-कॉज नोटिस) दिया गया, जिसमें अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका मिला।
जांच और जवाब के बाद प्रशासन ने सेवा समाप्ति का निर्णय लिया।
तीसरी संतान पर नौकरी गई! छतरपुर की लेडी टीचर पर एक्शन के बाद सरकारी शिक्षकों में हड़कंप
बताया जा रहा है कि वर्ष 2022 में इस मामले की शिकायत हुई थी, जिसके बाद विभागीय जांच शुरू हुई और जुलाई 2023 में उन्हें आरोप पत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। लेकिन प्रतिवाद असंतोषजनक पाए जाने के बाद, नियमानुसार सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई के बाद प्रदेश के हजारों शासकीय शिक्षक और कर्मचारी नियमों की पुनः समीक्षा में जुट गए हैं, क्योंकि यह निर्णय वर्ष 2001 के बाद की जनसंख्या नियंत्रण नीति के सख्त पालन का उदाहरण बन गया है।




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