भोपाल/मंदसौर, 20 अप्रैल – मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को मंदसौर जिले के गाँधी सागर अभयारण्य में दो चीतों को छोड़कर "चीता प्रोजेक्ट" के एक नए अध्याय की शुरुआत करेंगे। यह प्रदेश का दूसरा ऐसा स्थल होगा जहाँ चीतों को बसाया जा रहा है, इससे वन्य-जीव संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।
"चीता प्रोजेक्ट" मध्यप्रदेश की एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य देश में विलुप्त हो चुकी चीता प्रजाति का पुनर्वास और संरक्षण करना है। श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में पहले ही 26 चीते बसाए जा चुके हैं और अब गाँधी सागर अभयारण्य को चीतों का नया घर बनाया जा रहा है।
गाँधी सागर अभयारण्य, जो मंदसौर और नीमच जिले में फैला है, जैवविविधता और सांस्कृतिक धरोहरों से समृद्ध है। यहाँ सलाई, करधई, धौड़ा, तेंदू, पलाश जैसे वृक्षों के साथ-साथ चतुर्भुजनाथ मंदिर और रॉक सेंटर जैसे पुरातात्विक स्थल भी मौजूद हैं। यह क्षेत्र पहले से ही तेंदुआ, चिंकारा, ऊदबिलाव और मगरमच्छ जैसे दुर्लभ वन्य-प्राणियों का घर है।
भारत सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से अब तक चीता परियोजना पर 112 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिसमें से 67 प्रतिशत खर्च मध्यप्रदेश में हुआ है। दक्षिण अफ्रीका, केन्या और बोत्सवाना से आने वाले चीतों के जरिये इस परियोजना को और विस्तार दिया जाएगा। मई 2025 तक बोत्सवाना से 8 चीते लाने की योजना है।
इसके साथ ही मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकारों के बीच अंतर्राज्यीय चीता संरक्षण परिसर स्थापित करने पर भी सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है, जो इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “हम प्रकृति से प्रगति और प्रगति से प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए कृतसंकल्पित हैं। गाँधी सागर में चीतों का पुनर्वास इसी दिशा में एक सशक्त कदम है।”
यह पहल न केवल जैव विविधता को समृद्ध करेगी, बल्कि पर्यावरण प्रेमियों और देश-विदेश के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगी।




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