जबकि राजस्थान राज्य में वर्ष 1956 तक सिरोंज जिले के रूप में स्थापित था लेकिन मध्यप्रदेश के पुर्नगठन 1 नवंबर 1956 को सिरोंज को राजस्थान से हटाकर मध्यप्रदेश के विदिशा जिले का मात्र सब-डिवीजन बनाया गया है। किन्तु लटेरी एवं कुरवाई का एसडीएम कोर्ट सिरींज बनाया गया था जिसमें वर्तमान तहसील पठारी भी सम्मिलित हैं।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश गठन को 64 वर्ष हो चुके हैं इन 64 वर्षों में सिरोंज शहर एवं क्षेत्र की आबादी कई गुना बढ़ चुकी है, जिससे शासन की विकासकारी योजनाएँ का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पा रहा है। साथ ही पथरिया, सिरोंज तहसील की उप तहसील है तथा दो थाना क्षेत्र एवं दो राजस्व मण्डल उक्त क्षेत्र में आते हैं
इसलिए पथरिया को भी पूर्ण तहसील बनाकर सिरोंज जिले में सम्मिलित किया जा सकता है। ऐसे हो कस्वा आनंदपुर लटेरी क्षेत्र का यड़ा गांव है तथा दो थाना क्षेत्र उनारसी एवं आनंदपुर के लगभग 100 से अधिक ग्राम इस क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं पूर्व में भी आनंदपुर टप्पा रहा है। जिसे शामिल किया जा सकता है। यहीं वर्तमान में सिरोंज तहसील की आवादी आस-पास की तहसीलों जैसे लटेरी, कुरवाई, पठारी तथा उप तहसील पथरिया की आबादी से अधिक है, चूंकि सिरोंज तहसील उक्त 3 तहसीलों के मध्य में स्थित है।
वर्तमान तहसीले तथा संभावित नवीन तहसीलों को जोड़ने की मांगः कार्यकर्ताओं ने मांग करते हुए कहा कि वर्तमान में सिरोंज के साथ लटेरी, कुरवाई, पठारी तहसीलों तथा संभावित नवीन तहसील पथरिया एवं आनंदपुर को मिलाकर सिरोंज को जिला बनाया जा सकता है। जिससे उक्त 5 तहसीलों के नागरिकों को शासकीय कार्य हेतु असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। सिरोंज में दो अपर जिला एवं सत्र न्यायालय हैं, एडीशनल कलेक्टर का लिंक कोर्ट है, सभी विभागों के करीब 10 अनुविभागीय अधिकारियों की पदस्थापना है, 100 पलंगों का शासकीय अस्पताल है, विश्वविद्यालय तथा निजी महाविद्यालय तथा पोलिटेक्निक कॉलेज, आई. टी. आई. कॉलेज संचालित हैं। जिला मुख्यालय के बाद दूसरे नंबर का सबसे बड़ा कॉलेज सिरोंज में स्थित हैं। जिले के 17 थानों में से 8 थाने सिरोंज लटेरी विधानसभा में आते हैं इसके साथ ही लगभग सभी प्रमुख बैंको की शाखाएँ सिरोंज में उपलब्ध है एवं B श्रेणी की कृषि उपज मण्डी भी सिरोंज में है, जो पहले A श्रेणी की थी उक्त मण्डी के पुनः A श्रेणी की होने की संभावना भी हैं।
पूर्व में कुरवाई एवं लटेरी का अनुविभाग कर्यालय का मुख्यालय
सिरोज ही थाः सन् 1965 तक कुरवाई एवं लटेरी का अनुविभाग (सब डिवीजन) कार्यालय का मुख्यालय सिरोंज ही था एवं संपूर्ण प्रशासन सिरोंज-लटेरी एवं कुरवाई का सिरोंज से संचालित होता था तथा एडीएम कोर्ट भी सिरोंज नगर में लगता था। शमशाबाद तहसील के नागरिक भी सिरोंज को जिला बनाने हेतु सहमत हैं तथा शमशाबाद तहसील के बहुत से ग्राम सिरोंज की सीमा से जुड़े हुए हैं। शमशाबाद क्षेत्र के व्यक्तियों का आना जाना, कृषि उपज बेचना, सर्राफा आदि व्यापार करने सिरोंज ही आते हैं। सिरोंज को जिला बनाने की मांग लगभग 64 वर्षों से निरंतर की जा रही है। सिरोंज, लटेरी, कुरवाई, उप तहसील पथरिया जिला मुख्यालय विदिशा से ट्रेन से नहीं जुड़ा है, सिरोंज-लटेरी के नागरिक जिला मुख्यालय मात्र प्रायवेट बसों से यात्रा करते हैं।
विदिशा, सिरोंज से दूर एक कोने में है जो सांची रायसेन के निकट है अतैव सिरोंज, लटेरी, कुरवाई, शमशावाद, पठारी, कुरवाई के नागरिकों की असुविधा दूर करने के लिए सिरोंज को नवीन जिला गठित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। सर्वदलीय रूप से भी सिरोंज को जिला बनाने हेतु अनेक बार आंदोलन किये जा चुके हैं।
नवाबी शासन काल में भी कई गावों को रहा है तहसील दर्जा
रमेश यादव ने बताया कि नवाबी शासन काल में ऐसे कई गांव रहे हैं, जिन्हें उस समय तहसील का दर्जा प्राप्त था। जिसमें ग्राम दीपनाखेड़ा थाना मुख्यालय और कस्याताल, पथरिया, थाना मुख्यालय पूर्व में अलग-अलग तहसीले रही है। जिसका जिला मुख्यालय सिरोज हुआ करता था। जबकि वर्तमान में सिरोज तहसील में दीपनाखेड़ा, कस्बाताल सहित मुगलसराय, सिरोज थाना क्षेत्र सहित 94 पंचायत और पटवारी हल्का है एक नगर पालिका परिषद क्षेत्र ऐतिहासिक शहर भी है, सिरोज तहसील विदिशा जिले की सबसे बड़ी तहसील है। इससे
प्रशासनिक लक्ष्य प्राप्त करने में भी और प्रशासनिक व्यवस्था देखने में भी परेशानी आती है। तहसील लटेरी के ग्राम अम्हाई, बाजना तथा उनारसीकलां की दूरी जिला मुख्यालय से लगभग 150 किलोमीटर है। इस कारण नागरिकों को जिला मुख्यालय जाने के लिए बहुत अधिक परेशानी होती है। सिरोज को नया जिला बनाया जावे तथा लटेरी, कुरवाई, पठारी, शमशाबाद तहसील एवं नवीन संभावित तहसील पथरिया एवं आनंदपुर को सिरोंज जिले में सम्मिलित किया जाए।




0 टिप्पणियाँ