कैसे मिले उपचार चिकित्सा विशेषज्ञों के 3,618 पद, इनमें 2,404 पद खाली
सरकारी चिकित्सकों के चार हजार से ज्यादा पद खाली
भोपाल। वादों के बीच सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी को पूरा नहीं किया जा पा रहा है। प्रदेश में अब भी सरकारी चिकित्सकों के चार हजार से ज्यादा पद खाली हैं। जरूरत के महज 53 प्रतिशत चिकित्सक ही काम कर रहे हैं। कुल 47 प्रतिशत डाक्टरों की कमी अभी भी प्रदेश में बनी हुई है। संख्या में बात करें तो सरकारी अस्पतालों में 3,715 चिकित्सकों की जरूरत है, जबकि करीब आधे यानी 4,592 चिकित्सक ही काम कर रहे हैं। इनमें मी विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थिति ज्यादा खराब है। प्रदेश में चिकित्सा विशेषज्ञों के 3,618 पद हैं। इनमें से 66 प्रतिशत (2,404) पद खाली हैं। वहीं चिकित्सा अधिकारियों के 5,097 पदों में से लगभग 1,719 पद खाली हैं। अगर राजधानी भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर को छोड़ दें तो अन्य जिला अस्पतालों में हालात काफी खराब हैं। आसपास के जिलों में हालात यह है कि कही हड्डी रोग तो कही महिला रोग विशेषज्ञ ही नहीं हैं। अन्य राज्यों की ओर रुख कर रहे युवा चिकित्सकः जेपी अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डा एसके सक्सेना के मुताबिक प्रदेश में प्रमोशन की स्पष्ट पालिसी नहीं है। अन्य राज्यों के मुकाबले यहां चिकित्सकों का वेतन भी कम है। इन्हीं वजहों से नए चिकित्सक मध्य प्रदेश में शासकीय सेवा देने के बजाय केंद्र, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण के राज्यों में सेवा देना ज्यादा पसंद करते हैं।मेडिसिन और स्त्री रोग विशेषज्ञों की भारी कमी: स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में एमडी मेडिसिन, स्त्री रोग विशेषज्ञ के साथ एनिस्थिसिया विशेषज्ञों की भारी कमी है। 70 फीसद सरकारी अस्पतालों में एनिस्थिसिया विशेषज्ञ नहीं हैं।
डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए भर्तियां की जा रही हैं। अस्पतालों से जानकारी जुटाई जा रही है।
-डा. सुदाम खाड़े, आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण




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