जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज और उनकी सुविधाओं में इजाफा हो रहा है। सीटी स्कैन जांच के बाद अब आधुनिक लैब भी तैयार हो गई हैं जहां अब हर प्रकार की जांच हो सकेगी। इस हाई लेवल लैब में मशीनों का रखरखाव व सैंपल कलेक्ट करने का जिम्मा एक निजी कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी के कर्मचारी प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से भी सैंपल कलेक्ट कर अस्पताल के इक्टर कौर टेक्निशियन सैंपलों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करते हैं। यहां कैंसर से संबंधित सभी प्रकार के मार्कर टेस्ट, पीएसए टेस्ट हो रहे हैं। इसके अलावा महिलाओं और पुरुषों में एलएचएच, एफएचएस, पीआरएलए जैसे हार्मोन व विटामिन लेवल की सभी प्रकार की टेस्ट निशुल्क होंगे। पुरुषों में टेस्टो स्ट्रोम जांच होगी। ये सभी जांचे उन महिला एवं पुरुषों के लिए जरूरी हो जाती हैं जिनके बच्चे नहीं होते। मशीन इतनी एडवांस है कि टेस्ट रिपोर्ट एक्यूरेसी सटीक होगी। इससे डॉक्टर
इलाज करने में भी मदद मिलेगी। मरीज की सभी प्रकार की जांचों से शरीर में हार्मोन, विटामिन लेवल व कैंसर, का पता चलेगा।
इससे स्पेशलिस्ट डॉक्टर सभी प्रकार - के कैंसर रोग, लीवर, किडनी, हृदय, फेफड़ों, गुप्तांग, बांझपन से संबंधी रोगों का निदान कर मरीजों का इलाज आसानी से कर सकेंगे। ऐसे में मरीजों में बीमारी का पता समय रहते चलेगा और इलाज की सुविधा भी जांच के लिए निजी लैब या भोपाल नहीं जाना पड़ेगा,
इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब में हाई लेवल जांच होने से मरीजों को निजी लैब या फिर भोपाल नहीं जाना पड़ेगा। जिला अस्पताल से भी जांचों के लिए भोपाल सैंपल भेजे जाते थे, लेकिन अब ये जांचें स्थानीय अस्पताल में होगी। लैब टेक्निशियन राजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि यहां 102 प्रकार की जांचें निर्धारित की गई हैं इनमें से यदि कोई जांच इस लैब में नहीं हो पा रही है तो सैंपल लेकर उसे भोपाल भेजकर जांच कराएंगे, मरीज को रिपोर्ट यहीं मिलेगी।
वायरोलाजी लैब भी तैयार है, आने वाले समय में कोरोना की आरटपीसीआर जांच भी होगी। यहां पीपीई किट पहनने के लिए अलग से चार केबिन भी बनाए गए हैं। पहले यहां बच्चों का वार्ड था जिसे आइपीएच लैब में विकसित कर दिया है। मशीन तरह से कम्प्यूटराइज है जिसमें एक साथ 150 संपल रखकर जांचे की सकती है।
एचपीएलसी, सिकलसेल के मरीजों को राहत
मरीजों को राहत सिकल सेल और थैलेसीमिया के मरीजों को राहत मिल गई है। थैलेसीमिया के लिए होने वाली महत्वपूर्ण एचपी इलसी जांच अब अस्पताल की लैब में हो हो रही है। वहीं आमतौर पर बच्चों में देखी जाने वाली सिकल सेल की जांच भी लैब के माध्यम से की जा रही है। जिला अस्पताल के शिशुरोग विशेषज्ञ डा प्रमोद मिश्रा का कहना है कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए ये सबसे जरूरी होती है इससे पता चलता है कि बच्चे में कौनसा ट्रेट है, इससे उपचार सही होता है, दूसरे ट्रेट वाले मरीज के संपर्क में आने से रोका जा सकता है। विदिशा में थैलेसीमिया के मरोज भी बढ़ते जा रहे हैं उन्हें इससे काफी राहत मिली है।




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