सिरोंज स्वास्थ्य विभाग की महिला अधिकारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार लोकायुक्त विभाग ने की कार्यवाही

सिरोंज । लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार दोपहर को सिरोंज सिविल अस्पताल में पदस्थ • ब्लाक कम्यूनिटी मोबेलाइजर (बीसीएम) संध्या जैन को एक आशा कार्यकर्ता से सात हजार रुपये की रिश्वत लेते रंग हाथों पकड़ा है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण कायम किया गया है।

लोकायुक्त निरीक्षक रजनी तिवारी ने बताया कि सिरोंज तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम झुकरहोज की आशा कार्यकर्ता हरिबाई ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त भोपाल को इस बात की शिकायत की थी की सिरोंज के राजीव गांधी अस्पताल में पदस्थ बीसीएम संध्या जैन ने उसकी तथा उसकी दो और परिचित आशा कार्यकर्ताओं की - प्रोत्साहन राशि पिछले साल के नवंबर माह से नहीं निकली है, तथा भुगतान करने के एवज में उससे तीन हजार रूपये एवम उसकी परिचितों से चार - चार हजार रूपये रिश्वत देने के लिए दबाव बना रही है।

शिकायत पर कार्यवाही के लिए पुलिस अधीक्षक ने उनके नेतृत्व में टीम गठित थी। बुधवार दोपहर को जब आशा कार्यकर्ता हरिबाई सात हजार रूपये लेकर सिविल अस्पताल पहुंची।

जब वह अस्पताल में संध्या जैन को केमिकल लगे नोट दे रही थी, उसी समय लोकायुक्त टीम ने पहुंचकर संध्या जैन को पकड़ लिया। उनके हाथ धुलवाए गए, जिसमें उनके हाथों में नोट पर लाल रंग दिखने लगा। तिवारी ने बताया कि संध्या जैन के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही की गई है। लोकायुक की टीम में डीएसपी वीरेन्द्र सिंह, निरीक्षक उमा कुशवाह, प्रधान आरक्षक रामदास कुर्मी, राजेंद्र पावन, आरक्षक मनमोहन साहू, हेमेंद्र पटेल शामिल थे।'

बिना रिश्वत दिए नहीं होता भुगतान

फरियादी हरिबाई ने पत्रकारों से चर्चा में बताया कि बीसीएम संध्या जैन दो वर्ष पहले पदस्थ हुई है। जब से वे आई है तब से बिना रिश्वत दिए किसी आशा कार्यकर्ता की प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं होता। उनका कहना था कि सिरोंज तहसील में 282 आशा कार्यकर्ता है। जैन सभी से दो से तीन हजार रूपये भुगतान के बदले मांगती थी। हरिबाई के मुताबिक उन्हें नवंबर माह से प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। अगस्त माह की भी 144 आशा कार्यकर्ताओं की राशि नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि जैन हमेशा बजट नहीं होने का बहाना बनाकर भुगतान रोक देती है। इधर, डीसीएम राकेश पंथी ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं के लिए बजट सीधे राज्य शासन से ब्लाके में ही जाता है। बजट की कमी हो तो प्रस्ताव भेजते ही राशि मिल जाती है। उनका कहना था कि बजट स्वीकृत होने में तीन माह का समय नहीं लगता है। पंथी के मुताबिक संध्या जैन संविदा नियुक्ति पर है। लोकायुक्त से लिखित में जानकारी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ