सूचना आयुक्त के 8 पद खाली लोगों को कैसे मिलेगा न्याय जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान,

भोपाल , मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में आयुक्तों के आठ पद खाली हैं । आयुक्त की कमी के कारण इसका बोझ आम आदमी को झेलना पड़ा है जिससे अपील के लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है । आम आदमी को परेशान होना पड़ रहा है अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लोगों को न्याय कैसे मिलेगा । आमजन के पास सूचना पाने का सशक्त हथियार है सूचना का अधिकार है और नौकरशाहों और सरकार के लिए यह परेशानी भी है । ऐसे में जानकारी देने के बजाय अफसरों का प्रयास जानकारी छुपाने में ज्यादा रहा है । हालांकि इसमें उन्हें कामयाबी कम ही मिल पाती है । दूसरी ओर आयोग में काम का बोझ लगातार बढ़ा है । इसका सबसे बड़ा कारण राज्य सूचना आयुक्तों की संख्या में कमी आना है । 
 
दस आयुक्त एक मुख्य सूचना आयुक्त  आठ के कार्यकाल समाप्त दो आयुक्त के ऊपर प्रदेश भार का जिम्मा

गौरतलब है कि राज्य सूचना आयोग में 10 आयुक्त और एक मुख्य सूचना आयुक्त का सेटअप है । मौजूदा स्थिति में राज्य सूचना आयुक्तों की संख्या घटते घटते दो रह गई है । एक सूचना आयुक्त अरुण कुमार पाण्डेय का कार्यकाल हाल ही में समाप्त हुआ है । आयोग में एक साल से आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है । नवंबर 2021 में सामान्य प्रशासन विभाग ( जीएडी ) ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे थे । 121 दावेदारों ने आवेदन किए । इनमें रिटायर्ड आइएएस , आइपीएस , कई रिटायर्ड जज से लेकर पत्रकार भी शामिल हैं । एक साल में चार खाली : आयोग में पिछले एक साल में चार आयुक्तों के पद खाली. हुए हैं । इनमें रिटायर आइएएस डीपी अहिरवार , राजकुमार माथुर , रिटायर आइपीएस सुरेन्द्र सिंह , रिटायर आइएफएस गोल्ला कृष्णमूर्ति शामिल हैं । ये सभी सूचना आयुक्तों का कार्यकाल वर्ष 2021 में पूरा हुआ । अरुण कुमार पाण्डेय का कार्यकाल बीते 20 जुलाई को पूरा हो गया । सूचना आयुक्तों में संभाग स्तर पर काम काज की जिम्मेदारी की व्यवस्था है । अब सिर्फ दो आयुक्त विजय मनोहर तिवारी और राहुल सिंह ही कार्यरत हैं । डेढ़ साल से चल रही नियुक्ति प्रक्रिया : मप्र राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा आयुक्तों के 10 पद हैं , जिनमें से 8 खाली हैं । डेढ़ साल से सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रकिया चल रही है । नवंबर 2021 में सामान्य प्रशासन विभाग ( जीएडी ) ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए आवेदन बुलाए थे । 121 दावेदारों ने आवेदन किए । इनमें रिटायर्ड आईएएस , आईपीएस , कई रिटायर्ड जज से लेकर पत्रकार भी शामिल हैं । लेकिन आवेदन जमा होने के पूरे ड़ेढ साल बाद भी कोई नई नियुक्ति नहीं हो सकी है । राज्य सूचना आयोग के अधिकारियों का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह से जीएडी के अधीन हैं । इसमें आयोग का कोई दखल नहीं हैं । सूचना छुपाने में मप्र दूसरे नंबर पर : गौरतलब है कि सूचना के अधिकार के तहत जनहित से जुड़ी जानकारियां देने में जानबूझकर लापरवाही के मामले में मप्र के अफसर कर्नाटक के बाद दूसरे नंबर पर हैं ।


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