एक जैसा अपराध, दो सजा क्यों?प्रधानमंत्री की अपील पर एक्शन, लेकिन कार्रवाई में फर्क से उठे सवाल



भोपाल। प्रधानमंत्री Narendra Modi की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील के बाद प्रदेश भाजपा में लंबे काफिलों को लेकर पहली बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भाजपा किसान मोर्चा के नवनियुक्त भिंड जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव को सैकड़ों वाहनों का काफिला निकालने पर पद से हटा दिया गया। यह कार्रवाई महज 24 घंटे के भीतर हुई। वे केवल 18 दिन ही इस पद पर रह पाए। किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा ने 27 अप्रैल को उनकी नियुक्ति की थी।
वहीं दूसरी ओर, मप्र पाठ्यपुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर 700 गाड़ियों के काफिले के साथ उज्जैन से भोपाल पहुंचे, लेकिन उनके खिलाफ केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। सरकार ने फिलहाल उन्हें कामकाज से रोकते हुए निगम कार्यालय, बैठकों और प्रशासनिक फैसलों से दूर रहने के निर्देश दिए हैं। अंतिम निर्णय उनके जवाब के बाद लिया जाएगा।

दिल्ली तक पहुंचा मामला

सूत्रों के अनुसार सौभाग्य सिंह ठाकुर का मामला भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष तक पहुंचा। इसके बाद प्रदेश संगठन को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। चूंकि उनकी नियुक्ति अर्द्धशासकीय संस्था में हुई थी, इसलिए शासन स्तर पर कार्रवाई की गई।

नोटिस में क्या कहा गया

सरकार द्वारा जारी नोटिस में कहा गया कि सौभाग्य सिंह ने करीब 200 वाहनों की रैली निकाली, जबकि वास्तविक संख्या लगभग 700 बताई जा रही है। इसे सरकारी निर्देशों का गंभीर उल्लंघन माना गया है। जवाब मिलने तक उन्हें वाहन, सरकारी सुविधाओं और कर्मचारियों को निर्देश देने से भी रोक दिया गया है।

सवालों के घेरे में कार्रवाई

एक जैसे मामलों में अलग-अलग कार्रवाई को लेकर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं। सज्जन सिंह यादव को तत्काल पद से हटाया गया, जबकि सौभाग्य सिंह ठाकुर को केवल नोटिस देकर सीमित प्रतिबंध लगाए गए।
कई नेता फिर भी निकले काफिलों के साथ
प्रधानमंत्री की अपील और सख्ती के बावजूद कई भाजपा नेता और पदाधिकारी लंबे काफिलों के साथ नजर आए। इनमें पर्यटन मंत्री Dharmendra Lodhi, भाजपा विधायक Pritam Lodhi, लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण और खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष राकेश सिंह जादौन के नाम भी चर्चा में हैं। बुधवार को सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल और महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव भी बड़े काफिलों के साथ दिखाई दिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि नियम सबके लिए समान हैं, तो कार्रवाई भी एक जैसी होनी चाहिए। फिलहाल भाजपा और सरकार दोनों इस सवाल से घिरते नजर आ रहे हैं कि आखिर “एक जैसा अपराध, दो सजा क्यों?”

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