विदिशा । 11 साल पुराने एक मामले में न्यायालय के निर्देश के बाद विदिशा व्यापार महासंघ ने पीड़ित वकील को 25 हजार का चेक देकर मामले को समाप्त करने का आग्रह किया। इस मामले को लेकर वकील एवं पक्षकार स्वयं होने के चलते मामले में समझौता को स्वीकार कर लिया। दरअसल 11 साल पुराने मामले को स्वयं वकील खुद अपना केस लड़ रहे थे। विदिशा जिला अभिभाषक संघ के सदस्य एडवोकेट कैलाश किरार बताते हैं कि वर्ष 2012 में उनकी बहन की शादी थी। बारातियों को रोकने के लिए रीठा फाटक स्थित विदिशा व्यापार महासंघ के भवन में ऊपरी मंजिल को उन्होंने किराए पर लिया था। इसके लिए उन्होंने विदिशा व्यापार महासंघ के कोषाध्यक्ष नवल शास्त्री को 2 हजार भी अदा किए थे। जब बारात वहां पहुंची तो उन्हें मालूम हुआ कि वहां पहले से ही अन्य समाज की बारात ठहरी हुई है और उन्होंने पूरे व्यापार महासंघ कार्यालय को किराए पर लिया था। कैलाश किरार के परिवार में आई बारात को वहां स्थान नहीं मिला। इस मामले में जब उन्होंने व्यापार महासंघ के जिम्मेदारों से बात करनी चाही तो उन्हें सकारात्मक जवाब नहीं मिला। जिससे दुखी होकर और समाज में हुई बदनामी के चलते 20 जून 2012 को विदिशा व्यापार महासंघ और पदाधिकारियों को कोर्ट नोटिस भेजा।
उनके जवाब से वह संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद 3 अगस्त 2012 को उन्होंने उपभोक्ता फोरम में मामला दायर किया। उपभोक्ता फोरम ने 123/2012 मैं इस मामले को संज्ञान में लिया। तमाम दलीलों के आधार पर पीड़ित एडवोकेट कैलाश किरार के पक्ष में उपभोक्ता फोरम ने 15 हजार रुपए मानसिक प्रताड़ना के एवज में राशि अदा करने और 1500 रुपए मुकदमा व्यय के रूप में अदा करने के निर्देश व्यापार महासंघ को दिए थे। इसके साथ ही एक अगस्त 2012 से राशि न दिए जाने पर 9 फीसदी वार्षिक ब्याज भी लगाने के आदेश भोक्ता फोरम ने दिए।
इस आदेश के खिलाफ व्यापार महासंघ ने मध्यप्रदेश राज्य उपभोक्ता फोरम में अपील दायर की। करीब 10 साल तक मामला वहां लंबित रहा। 19 सितंबर 2022 को व्यापार महासंघ की ओर से इसमें अपनी गलती स्वीकारी और जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा जो राशि अदा करने के निर्देश दिए थे उसमें कम करने की गुहार लगाई। मध्य प्रदेश उपभोक्ता फोरम में 15000 की राशि को घटाकर 10,000 रूपये करने के साथ मुकदमा व्यय 1500 को यथावत रखा। उसमें भी 9 फीसदी वार्षिक ब्याज जोड़ने के निर्देश दिए।
इस पूरे मामले को लेकर पूर्व व्यापार महासंघ अध्यक्ष देवराज अरोड़ा, पूर्व महामंत्री घनश्याम बंसल, और पूर्व कोषाध्यक्ष नगर शास्त्री 25 हजार का चेक लेकर उनके पास पहुंचे और मामले को समाप्त करने की अपील की। जिस पर पीड़ित और इस केस के वकील एडवोकेट कैलाश किरार ने 25 हजार का चेक स्वीकार किया मामले में समझौता किया।




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