अकेले बांधवगढ़ में 150 से बाघ होने की संभावना है । कान्हा में ज्यादा बाघों की संख्या 120 के पार बताई जा रही है । 2018 की गणना के दौरान जो 60 से ज्यादा शावक एक साल से कम के थे , वे भी 2022 की गणना का हिस्सा बने हैं । यही वजह है कि मध्य प्रदेश के टाइगर स्टेट का दर्जा कायम रहने की संभावना प्रबल नजर आ रही है ।
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पहले से ज्यादा बीट में बाघ : 2014 की गणना में महज 714 बीट में 308 टाइगर देखे गए । 2018 में 1432 बीच में 526 टाइगर दिखाई दिए । 2022 की गणना में दो हजार से ज्यादा बीट में बाघ देखे जाने की जानकारी है । पिछली गणना में मप्र में 526 बाघ थे , जिनमें एक वर्ष के कम के 60 शावक गणना से छूट गए थे । टाइगर रिजर्व और सामान्य वन मंडलों में बाघ शावकों की संख्या लगभग 196 थी । इस तरह यह अनुमानित आंकड़ा 782 हो जाता है । 2019 से जून 2022 तक 125 बाघों की मौत हो गई थी , जिससे अनुमानित आंकड़ा 657 से ज्यादा हो सकता है ।
इनका कहना है इस बार की गणना में पिछली बार से ज्यादा वन बीटों में बाय दिखाई दिए हैं । प्रदेश में बाघों की बेहतर संख्या होने का अनुमान है । कुछ दिन और पेट रखिए पूरे आंकड़े सामने आ जाएंगे ।
जेएस चौहान , पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ मध्य प्रदेश ,
यह हैं 2018 की गणना के परिणाम : मध्य प्रदेश ( 526 ) , कर्नाटक ( 524 ) , उत्तराखंड ( 442 ) , महाराष्ट्र ( 312 ) , तमिलनाडु ( 264 ) , केरल और असम 190-190 , उत्तर प्रदेश ( 173 ) , राजस्थान ( 91 ) , बंगाल ( 88 ) आंध्र प्रदेश ( 48 ) , अरुणाचल प्रदेश ( 29 ) बिहार ( 31 ) , ओडिशा ( 28 ) , छत्तीसगढ़ ( 19 ) , गोवा ( 3 ) , झारखंड ( 5 ) कुल 2,967 बाघ भारत में पाए गए थे ।




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