Suicide: पुलिस प्रताड़ना’ से परेशान युवक ने दी जान, प्रेम विवाह का था मामला


इंदौर.  छात्र की आत्महत्या के केस में एक तत्कालीन थाना प्रभारी और सब इंस्पेक्टर के खिलाफ अदालत ने एफआईआर करने के निर्देश दिए इंदौर की एक विशेष अदालत ने दोनों के खिलाफ केस करने का आदेश दिया है. कुछ दिन पहले एसीपी ने अपनी जांच में इन पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दे दी थी. एक साल से इंदौर की विशेष अदालत में इस केस की सुनवाई चल रही है.

बीते साल इंदौर के एरोड्रम थाना इलाके के विजय श्रीनगर में रहने वाले बीएससी के छात्र आकाश बडिया ने सुसाइड कर लिया था. उसने अपने ही घर मे फांसी लगाकर जान दे दी थी. घटना की जानकारी के बाद पुलिस ने शव को बरामद किया था. इस दौरान परिवार वालों को आकाश के मोबाइल में एक मैसेज मिला था. इसमें आकाश ने चंदन नगर के तत्कालीन थाना प्रभारी दिलीप पुरी और सब इंस्पेक्टर विकास शर्मा पर प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए थे.

मृतक आकाश को पुलिसकर्मियों ने दी थी धमिकयां

इस पूरे मामले में मृतक छात्र आकाश का सब इंस्पेक्टर विकास शर्मा की पहचान की एक युवती के साथ प्रेम प्रसंग था. दोनों शादी करना चाहते थे. एडवोकेट नीरज सोनी के मुताबिक इसकी भनक लड़की के पिता को लगी तो उसने टीआई दिलीप पुरी और सब इंस्पेक्टर विकास शर्मा से मिलकर आकाश बडिया को धमकाने के लिए कहा था. इसके बाद इन पुलिसकर्मियों ने आकाश को चंदन नगर थाने लाकर पीटा और गंभीर धाराओं में फर्जी एफआईआर दर्ज करने की धमकी दी. पुलिस की प्रताड़ना से तंग और सदमे में आकर आकाश ने दोनों को जिम्मेदार बताते हुए फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. 

कोर्ट की शरण में पहुंचा परिवार

मृतक के भाई विकास बडिया ने एससी-एसटी विशेष कोर्ट में दोनों पुलिसकर्मियों टीआई दिलीप पुरी और सब इंस्पेक्टर विकास शर्मा पर एफआईआर दर्ज करने का आवेदन लगाया था. एडवोकेट सोनी के तर्क सुनने और साक्ष्य देखने के बाद विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने  आकाश को परेशान करने वाले दोनों पुलिस अधिकारियों पर विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. आकाश की मौत के बाद इस केस की जांच एसीपी राजीव भदौरिया को सौंपी गयी थी. जांच में मोबाइल में और भी कई मैसेज मिले थे. इसमें प्रेमिका से शादी ना कर पाना आत्महत्या की वजह बताई गई थी. लेकिन जांच में इन सब बातों को नजरअंदाज कर दोनों पुलिसकर्मियों को एसीपी ने क्लीन चिट देते हुए दोषमुक्त कर दिया था.


कोर्ट ने जारी किए पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर के आदेश 

कोर्ट की सुनवाई में आकाश को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दोनों पुलिस कर्मियों टीआई दिलीप पुरी और सब इंस्पेक्टर विकास शर्मा को दोषी पाया गया है. प्रेम विवाह रोकने के लिए सब इंस्पेक्टर विकास शर्मा ने आकाश को जमकर पीटा था. टीआई दिलीप पुरी ने भी रोकने की बजाए उसका साथ दिया था. जांच कर रहे वरिष्ठ अफसर ने भी वर्दी का साथ निभाया और क्लीनचिट दे दी. मृतक की मां भी होम गॉर्ड में सैनिक के पद पर पदस्थ थी. उसने भी अफसरों के इस कृत्य का विरोध किया, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई. परिवार जब पुलिस की प्रताड़ना से तंग आ गया तो उसने कोर्ट की शरण ली. कोर्ट में एक साल तक सुनवाई चली. इसके बाद अब कोर्ट ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए हैं.


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