भोपाल।
मध्य प्रदेश के सारे शराब अहाते और शॉप बार बंद होने जा रहे हैं. शिवराज सरकार ने कैबिनेट बैठक में ये बड़ा फैसला लिया है. जोर देकर कहा गया है कि लोग शराब खरीद सकेंगे लेकिन दुकान पर बैठकर नहीं पी सकेंगे. इसके अलावा अब गर्ल्स हॉस्टल और सभी प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों से 100 मीटर की दूरी तक शराब की दुकानें नहीं खोली जाएंगी.
शिवराज सरकार ने रविवार को प्रदेश में 2611 अहाते और शाप बार बंद करने का बड़ा निर्णय लिया है । दुकानों में बैठाकर शराब पिलाने की व्यवस्था भी नहीं होगी । धार्मिक स्थल , शैक्षणिक संस्थान , बालिका छात्रावास से सौ मीटर के दायरे में कोई भी शराब दुकान नहीं होगी ।
जारी आदेश में ये भी साफ कहा गया है कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने के प्रावधान और कड़े किए जाएंगे. ऐसे में राज्य में शराब को लेकर पहले की तुलना में सख्ती ज्यादा रहने वाली है. शिवराज सरकार की तरफ से ये फैसला उस समय लिया गया है जब राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की दिग्गज नेता उमा भारती द्वारा शराब पर प्रतिबंध की लगातार मांग उठाई जा रही है
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में वर्ष 2010 से कोई भी नई शराब दुकान नहीं खोली गई है । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में वर्ष 2023 के लिए आबकारी नीति के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई । इसमें शराब को हतोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं । शराब दुकानों में शराब पिलाने और अहातों से कानून व्यवस्था को लेकर उठाने वाले सवालों को देखत हुए सरकार ने तय किया है कि इन्हें बंद किया
• प्रदेश कैबिनेट बैठक में आबकारी नीति 2023 को दी गई मंजूरी •
बजट प्रस्ताव को दी अनुमति , तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का होगा जाएगा । पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी यही मांग कर रही थीं कि अहातों को बंद किया जाए । डा . नरोत्तम मिश्रा साथ ही धार्मिक स्थलों के आसपास शराब की दुकानें न हों ।
गृह मंत्री डा . नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान भी नर्मदा नदी के पांच किलोमीटर के दायरे में शराब दुकानों को बंद करने का निर्णय लिया था । इसी को आगे बढ़ाते हुए अहातों और दुकानों में बैठाकर शराब पिलाने की व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है । बैठक में इसके अलावा वर्ष 2023-24 के बजट प्रस्ताव को भी अनुमति दी गई ।
यह भी निर्णय हुए • घर से जल निकासी या शौच गृह की व्यवस्था न बनाने पर अब पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगेगा । सरकार विधानसभा के बजट सत्र में नगर पालिक विधि अधिनियम में संशोधन करेगी । वर्तमान अधिनियम में तीन माह के कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड का प्रविधान है । शिवराज सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए 31 दिसंबर 2020 तक नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि पर निवासरत गरीबों को आवासीय पट्टे देने का निर्णय लिया है । अभी तक 31 दिसंबर 2014 तक निवासरत व्यक्तियों को ही पट्टा दिए जाने का प्रविधान था । • ग्वालियर जिले में अभी लश्कर , मुरार और सिटी सेंटर तहसील गठित हैं । ग्वालियर ग्रामीण तहसील का गठन प्रस्तावित किया गया है । इसमें कुल 36 पटवारी हलके शामिल किए जाएंगे ।




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