शराब नीति को लेकर उमा भारती फिर हुई उग्र मंदिर में डेरा

शराब नीति को लेकर उमा भारती फिर हुई उग्र मंदिर में डेरा 

भोपाल प्रदेश में शराबबंदी की मांग कर रही पूर्व मुख्यमंत्री उमा द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र से एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है । उमा का पत्र ऐसे समय में सामने आया है , जब आबकारी विभाग नई शराब नीति तैयार करने के अंतिम पृष्ठ तक पहुंच गया है । उमा ने मुख्यमंत्री को दिए परामर्श में बताया कि नई शराब नीति ऐसी हो , जिससे लोग शराब पीने से हतोत्साहित हों ।
उमा ने अहातों में शराब पर पाबंदी लगाने । शिक्षण संस्थाओं से शराब दुकान की दूरी एक किमी , धार्मिक स्थलों , मजदूर बस्ती , अस्पताल , कोर्ट , बस अड्डा से दूरी आधा किमी करने । शराब की दुकान एवं बोतल पर शराब की बुराईयां लिखें । उमा न लिखा कि इससे राजस्व घटेगा , लेकिन प्रदेश के लोगों की भलाई जरूरी है । भाजपा शासित राज्यों में मप्र शराब नीति पर आदर्श राज्य बन सकता है ।

उमा भारती शनिवार दोपहर भोपाल के अयोध्या नगर तिराहे स्थित एक मंदिर पहुंचीं और घोषणा की कि वह 31 जनवरी को राज्य सरकार की नई शराब नीति के ऐलान के इंतजार में अगले तीन दिनों तक इसी मंदिर में रहेंगी और वहीं बैठकर इसको सुनेंगी.


मैं सीएम होती तो पूर्ण शराबबंदी लागू करती उमा भारती

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि, ‘‘मैंने कभी नहीं कहा कि पूर्ण शराबबंदी होनी चाहिए. मैंने कहा था कि अगर यह मेरे नियंत्रण में रहता तो मैं पूर्ण शराबबंदी लागू करती. मुझे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर पूरा भरोसा है. मैं 31 जनवरी को नई शराब नीति के बारे में फैसले का इंतजार करुंगी.’’

उमा ने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि उनके रुख से कांग्रेस को फायदा हो. उन्होंने कहा कि अगर भाजपा नीत प्रदेश सरकार नियंत्रित शराब वितरण प्रणाली लागू करती है तो भाजपा 2003 में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव की तरह इस साल नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी अपनी रिकॉर्ड जीत को दोहराएगी.

3 दिन पहले शिवराज सिंह चौहान ने कही थी ये बात
मालूम हो कि मुख्यमंत्री चौहान ने दो दिन पहले 74वें गणतंत्र दिवस पर जबलपुर के गैरिसन ग्राउंड पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था, ‘‘हम नई शराब नीति लाने वाले हैं. उसमें नशे की आदत को हतोत्साहित करने का भरपूर प्रयास करेंगे.’’

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