पुरानी पेंशन को लागू कराने को लेकर 5 फरवरी को भोपाल में महाकुंभ…

पुरानी पेंशन को लागू कराने को लेकर 5 फरवरी को भोपाल में महाकुंभ…


भोपाल मध्यप्रदेश | राजस्थान छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में पुरानी पेंशन स्कीम लागू होने के बाद अब बीजेपी शासित प्रदेश में भी पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग द‍िन पर द‍िन जोर पकड़ रही है. कांग्रेस शास‍ित ह‍िमाचल प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, राजस्‍थान और झारखंड में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल कर द‍िया गया है. इसके अलावा पंजाब सरकार ने भी अपने कर्मचार‍ियों को पुरानी पेंशन का लाभ देना शुरू कर द‍िया है. अब केंद्र और राज्य के कम से कम 50 संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग की. उन्होंने कहा कि फ‍िलहाल राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) र‍िटायर्ड कर्मियों के लिए नुकसानदायक साबित हुई है.

राजस्थान छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब हिमाचल प्रदेश  राज्य सरकार, सहित ऐसे कई प्रदेश हैं इन प्रदेशों ने वो कर दिखाया है जो कई दूसरे राज्य नहीं कर सके हैं. यह वो राज्य है जो पुरानी पेंशन योजना फिर से शुरू कर चुके हैं. इसके साथ ही इन राज्यों ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को बंद कर दिया है. हालांकि अब एक बार फिर से कई राज्य सरकारें पुरानी पेंशन योजना पर शिफ्ट हो रहे हैं. वहीं कुछ राज्य तो पुरानी पेंशन योजना को लागू भी कर चुके हैं. ओपीएस के बारे में बात की जाए तो पुरानी पेंशन योजना कर्मचारियों को उनके Last Drawn Basic Pay का 50% और सेवानिवृत्ति पर महंगाई भत्ता या सेवा के पिछले दस महीनों में उनका औसत वेतन, जो भी उनके लिए अधिक लाभप्रद हो, प्राप्त होता है. इसके लिए कर्मचारी के लिए दस साल की सेवा अनिवार्य है.

नई पेंशन योजना और पुरानी पेंशन योजना

पूरे देश के हर एक राज्य में  इन दिनों पुरानी पेंशन योजना काफी सुर्खियों में हैं. पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन योजना दोनों एक दूसरे से अलग हैं. एनपीएस एक निवेश आधारित पेंशन योजना है, जो पुरानी पेंशन योजना के विपरीत है. पुरानी पेंशन योजना एक पेंशन उन्मुख योजना है और रिटर्न बढ़ाने के लिए बाजार में कुछ पैसे का इंवेस्टमेंट करती है. ओपीएस के बारे में बात की जाए तो पुरानी पेंशन योजना कर्मचारियों को उनके Last Drawn Basic Pay का 50% और सेवानिवृत्ति पर महंगाई भत्ता या सेवा के पिछले दस महीनों में उनका औसत वेतन, जो भी उनके लिए अधिक लाभप्रद हो, प्राप्त होता है. इसके लिए कर्मचारी के लिए दस साल की सेवा अनिवार्य है.

संसद के मानसून सत्र के दौरान जुलूस निकालेंगे
पुरानी पेंशन लागू करने को लेकर हाल ही में आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का बयान आया था. उन्‍होंने कहा था यद‍ि ओपीएस (OPS) को लागू क‍िया गया तो यह अर्थव्‍यवस्‍था के लिए अच्‍छा नहीं होगा. कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यद‍ि सरकार ने उनकी मांग पर कोई कार्रवाई नहीं की तो वे संसद के मानसून सत्र के दौरान जुलूस निकालेंगे. राष्ट्रीय संयुक्त कार्रवाई परिषद (NJCA) के बैनर तले संगठनों ने बयान जारी कर कहा कि मांग को लेकर 21 जनवरी को दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा.


यह बनाई गई है पेंशन स्कीम

ओपीएस के तहत कर्मचारियों को अपनी पेंशन में योगदान करने की आवश्यकता नहीं है. सरकारी नौकरी के तहत एक प्रोत्साहन ये भी दिया जाता है कि रिटायरमेंट के बाद पेंशन और पारिवारिक पेंशन की गारंटी मिले. हालांकि जीवन प्रत्याशा में वृद्धि के कारण ओपीएस सरकारों के लिए अस्थिर हो गया, जिसके बाद साल 2004 में नई पेंशन योजना लाई गई थी.

मंत्रालय के कर्मचारी भी शामिल होंगे इस महाकुंभ में

पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर पांच फरवरी को भोपाल में महाकुंभ होगा। इसमें अब मंत्रालय के कर्मचारी भी शामिल होने की तैयारी में है। यह निर्णय पुरानी पेंशन बहाली संघ और मंत्रालय कर्मचारियों की संयुक्त बैठक में लिया गया। साथ ही यह भी निर्धारित किया गया कि मंत्रालय कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली को लेकर संकल्प पत्र भरेंगे। मंत्रालय परिसर में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पूरे देश में और मध्य प्रदेश में चल रहे पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन को मंत्रालयीन कर्मचारियों द्वारा समर्थन दिया जाएगा। पांच फरवरी को भोपाल में होने वाले पुरानी पेंशन महाकुंभ में भी मंत्रालय के कर्मचारी भी उपस्थित रहेंगे। पुरानी पेंशन बहाली संघ के प्रांतीय अध्यक्ष परमानंद डेहरिया ने पुरानी पेंशन बहाली के लिए चल रहे राष्ट्रीय आंदोलन के बारे में जानकारी दी और पांच राज्यों में मिली सफलता के बारे में बताया

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