भोपाल । मध्यप्रदेश को पहले ही टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त है और मध्यप्रदेश में ही बाघों की रक्षा करने में कमजोर साबित होता नजर आ रहा है । देश में इस साल अब तक कुल 107 टाइगरों की जान जा चुकी है । इनमें सर्वाधिक 32 मौतें मध्यप्रदेश में हुई हैं , जबकि पिछले साल प्रदेश में 42 बाघों की मौत हुई थी । टाइगर कंजर्वेशन में कर्नाटक का रिकॉर्ड सबसे बेहतर है । कर्नाटक में टाइगर की संख्या 524 है , जो मध्यप्रदेश से सिर्फ 2 ही कम है । इस साल कर्नाटक में सिर्फ 13 ही टाइगर की मौत दर्ज की गई है । मध्यप्रदेश में सर्वाधिक छह टाइगर रिजर्व हैं । नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की रिपोर्ट के अनुसार 7 टाइगर की मौत बांधवगढ़ नेशनल पार्क , 6 की पेंच नेशनल पार्क , 4 की कान्हा नेशनल पार्क , 2 की संजय नेशनल पार्क , इसके अलावा पन्ना और सतपुड़ा के भीतर 1-1 टाइगर की इस साल मौत हुई है । ज्यादातर मौतों की वजह एक्सीडेंटल या टेरिटोरियल फाइट है । ।
सफारी बनानी बाघों की मौत का कारण
जबलपुर हाई कोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका में कहा गया कि पेंच में छह और बांधवगढ़ में एक बाघ की मौत टाइगर सफारी का निर्माण कार्य शुरू होने के बाद हुई है. इसमें से एक बाघ का शिकार किया गया था. इसकी पुष्टि बाद में एनटीसीए की रिपोर्ट में भी हुई. बफर जोन में बिना वैरिफिकेशन मजदूरों को एंट्री दी गई थी. याचिकाकर्ता अजय दुबे ने बताया कि टाइगर रिजर्व के बफर जोन में टाइगर सफारी शुरू करने के एमपी फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के प्रस्ताव पर सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी. वन विभाग और मध्यप्रदेश ईको टूरिज्म बोर्ड के अफसरों ने सीजेडए की आपत्ति को खारिज कर दिया था.





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