न्यायालय से सब जेल तक भी निजी वाहन का हुआ इस्तेमाल, पुलिस की व्यवस्था और जवाबदेही पर चर्चा
बेगमगंज। पत्रकार और उनके भाई पर कथित प्राणघातक हमले के मामले में गिरफ्तार आरोपितों को उनकी ही गाड़ी से न्यायालय और सब जेल तक ले जाने का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर आरोपितों को पुलिस के वाहन के बजाय उनके निजी वाहन से ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी?
मामला प्रेस संघ अध्यक्ष कृष्णा यादव और उनके भाई देवेश यादव पर हुए कथित हमले से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, विगत दिनों कवरेज के लिए गए दोनों भाइयों पर आधा दर्जन से अधिक लोगों ने हमला किया था। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने छह आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
न्यायालय से सब जेल तक भी निजी वाहन का इस्तेमाल
इस मामले में सबसे अधिक चर्चा आरोपितों को न्यायालय ले जाने के लिए उनकी ही गाड़ी का उपयोग किए जाने को लेकर है। बताया गया है कि न्यायालय से आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद करीब 100 मीटर दूर स्थित सब जेल तक भी इसी वाहन से पहुंचाया गया।
जब यह मामला पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, तो सुरक्षा व्यवस्था का हवाला दिया गया। हालांकि, पुलिस के पास उपलब्ध वाहनों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया और आरोपितों के निजी वाहन से उन्हें ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी, इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता
पत्रकारों पर हमले की घटनाएं पहले भी चिंता का विषय रही हैं। ऐसे में कवरेज के दौरान पत्रकार और उनके भाई पर कथित हमले के बाद आरोपितों को उनकी ही गाड़ी से न्यायालय और जेल तक ले जाने का मामला सामने आने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, केवल निजी वाहन के इस्तेमाल के आधार पर पुलिस और आरोपितों के बीच किसी तरह की मिलीभगत का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि पुलिस प्रशासन पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों को स्पष्ट करे, ताकि व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।
छह आरोपित न्यायिक हिरासत में, एक के फरार होने की जानकारी
मामले में भूपेंद्र सिंह, प्रशांत लोधी, रामकुमार कुशवाहा, प्रतीक जैन, अरविंद आदिवासी और प्रमोद यादव को न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, एक अन्य आरोपित धर्मेंद्र आदिवासी के फरार होने की बात भी कही जा रही है।
अब सवाल यह है कि पत्रकार और उनके भाई पर हुए कथित हमले के मामले में पुलिस की कार्रवाई किस तरह आगे बढ़ती है और आरोपितों को निजी वाहन से ले जाने के पीछे की वजह क्या थी। पुलिस प्रशासन की ओर से इस घटनाक्रम पर विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।




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