डिंडौरी में कलेक्टर का सख्त एक्शन: पंचायत भवन के 40 लाख रुपये निकाले, निर्माण अधूरा; सरपंच को तीन दिन का अल्टीमेटम,


सचिव निलंबित, सरपंच से राशि वसूली के निर्देश; आदर्श आंगनवाड़ी केंद्र में दर्ज 41 बच्चों में से एक भी नहीं मिला उपस्थित

डिंडौरी, । मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और अनियमितताओं को लेकर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने सख्त रुख अपनाया है। ग्राम पंचायत गणेशपुर में पंचायत भवन निर्माण के लिए आवंटित करीब 37.50 लाख रुपये की राशि निकालने के बावजूद भवन का निर्माण अधूरा मिलने पर कलेक्टर ने पंचायत सचिव को निलंबित करने तथा सरपंच से राशि की वसूली और दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, सरपंच को तीन दिन के भीतर राशि जमा करने का अल्टीमेटम दिए जाने की जानकारी सामने आई है।


40 लाख रुपये निकाले, फिर भी अधूरा पड़ा पंचायत भवन

कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने विकासखंड डिंडौरी के ग्राम गणेशपुर में पंचायत भवन निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान सामने आया कि भवन निर्माण के लिए स्वीकृत लगभग  37.50 लाख रुपये की राशि सरपंच, सचिव और पंचायत द्वारा पूरी निकाल ली गई लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने पंचायत सचिव भगवत प्रसाद यादव के निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही सरपंच अमर सिंह पट्टा से राशि की वसूली और नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई करने को कहा।

आंगनवाड़ी में दर्ज 41 बच्चों में से एक भी उपस्थित नहीं

कलेक्टर ने आदर्श आंगनवाड़ी केंद्र नरिया सेंटर, नूनखान का भी औचक निरीक्षण किया। यहां बच्चों की उपस्थिति की स्थिति बेहद चिंताजनक मिली। केंद्र में कुल 41 बच्चे दर्ज थे, लेकिन निरीक्षण के दौरान एक भी बच्चा उपस्थित नहीं मिला।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केंद्र पर मौजूद थीं, जबकि सहायिका के संबंध में बताया गया कि वह पिछले 15 दिनों से केंद्र नहीं आ रही थीं।

कलेक्टर ने बच्चों की अनुपस्थिति और सहायिका की लगातार गैरहाजिरी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यकर्ता और सहायिका के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

सरकारी धन और योजनाओं की निगरानी पर उठे सवाल

एक ओर पंचायत भवन के निर्माण के लिए जारी लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद काम अधूरा मिला, वहीं दूसरी ओर आंगनवाड़ी केंद्र में दर्ज बच्चों की शत-प्रतिशत अनुपस्थिति ने व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्टर के निरीक्षण के बाद अब पंचायत भवन निर्माण में हुई अनियमितताओं और आंगनवाड़ी केंद्र की कार्यप्रणाली पर प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

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