सीएम हेल्पलाइन में जवाब देने से पहले तहसीलदार-नायब तहसीलदार को करना होगा स्थल निरीक्षण, पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर नहीं होगा निराकरण
विदिशा। रास्ता विवाद और अतिक्रमण से जुड़ी सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ाई है। कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने जिले के सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसी शिकायतों में अब संबंधित तहसीलदार या नायब तहसीलदार स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थल का निरीक्षण करेंगे। मौके की वास्तविक स्थिति की जांच और राजस्व अभिलेखों से मिलान के बाद ही सीएम हेल्पलाइन पर जवाब दर्ज किया जाएगा।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि केवल कार्यालय में बैठकर या पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर शिकायत का निराकरण दर्शाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। संबंधित अधिकारी को मौके पर जाकर शिकायतकर्ता की समस्या और वास्तविक स्थिति को समझना होगा।
नक्शे और अभिलेखों से होगा मौके का मिलान
रास्ते और अतिक्रमण से जुड़े मामलों में आवश्यकता के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे और मौके की स्थिति का मिलान किया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई कर विवाद का स्थायी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर दिए जवाब होंगे अमान्य
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मात्र पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर सीएम हेल्पलाइन में दर्ज किए गए जवाब अमान्य किए जा सकते हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्थल निरीक्षण के बाद ही तथ्यात्मक और स्पष्ट जवाब पोर्टल पर दर्ज करें।
कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन शासन की महत्वपूर्ण जनसुनवाई व्यवस्था है। इसमें प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से निराकरण करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। खासकर रास्ता विवाद और अतिक्रमण जैसे मामलों में मौके की वास्तविक स्थिति जाने बिना शिकायत का निराकरण करना आमजन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। इसलिए अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर जांच करें और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।
प्रशासन के इस निर्देश से रास्ता विवाद और अतिक्रमण की शिकायतों के निराकरण में मौके की वास्तविक स्थिति सामने आने के साथ शिकायतकर्ताओं को अधिक प्रभावी और संतोषजनक समाधान मिलने की उम्मीद है।




0 टिप्पणियाँ