दहशत : महामाई के जंगल में मादा तेंदुए ने दो शावकों के साथ बनाया डेरा


फोरलेन पर टहलती और संग्रहालय की बाउंड्रीवाल पर बैठी दिखी मादा तेंदुआ, लगातार साइटिंग से वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी

सिरोंज। सिरोंज के कमलिया और पर्वतपुर क्षेत्र में करीब एक माह पहले दिखाई दिया मादा तेंदुआ अब अपने दो शावकों के साथ महामाई के जंगल में डेरा जमाए हुए है। शुक्रवार रात मादा तेंदुआ महामाई फोरलेन पर टहलती दिखाई दी। इसके बाद वह महामाई परिसर में निर्माणाधीन संग्रहालय की बाउंड्रीवाल पर काफी देर तक बैठी रही। इस दौरान मौजूद लोगों ने उसका वीडियो भी बनाया। लगातार तेंदुए की मौजूदगी सामने आने के बाद वन विभाग ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के साथ ही ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को सतर्क रहने की सलाह दी है।

पहली बार 27 जुलाई को दिखा था तेंदुआ

क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी पहली बार 27 जुलाई की रात सामने आई थी। कमलिया रोड से चार पहिया वाहन से गुजर रहे बिट्टू खान ने सड़क किनारे बैठे तेंदुए का वीडियो बनाया था। शुरुआत में कुछ लोगों ने वीडियो को फर्जी बताया, लेकिन वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद जंगल में सर्चिंग शुरू कराई गई। सर्चिंग के दौरान वन अमले को तेंदुए के पगमार्क मिले, जिससे क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि हुई।

पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग ने कमलिया, पर्वतपुर, तरवरिया और महामाई सहित आसपास के गांवों में ग्रामीणों को सतर्क करना शुरू किया। सर्चिंग का दायरा बढ़ाया गया तो वन अमले को भी तेंदुए के दर्शन हुए।

महामाई दरबार के आसपास कई बार दिखा

वन विभाग ने दिन के साथ रात में भी क्षेत्र में सर्चिंग तेज कर दी। इस दौरान मादा तेंदुआ महामाई दरबार के आसपास कई बार दिखाई दी। कभी वन कर्मचारियों ने उसे देखा तो कभी वहां तैनात पुलिस जवानों को तेंदुए की मौजूदगी नजर आई।

शुक्रवार रात मादा तेंदुआ पहले महामाई फोरलेन पर टहलती दिखाई दी। इसके बाद वह निर्माणाधीन संग्रहालय की बाउंड्रीवाल पर जाकर बैठ गई। काफी देर तक वहां रहने के बाद वह जंगल की ओर चली गई। तेंदुए की इस चहलकदमी का वीडियो भी सामने आया है।

एक माह में चार बकरों का कर चुकी है शिकार

वन अमला शुरुआत से ही मादा तेंदुए और उसके शावकों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। जंगल में ट्रैप कैमरे भी लगाए गए थे, लेकिन घने जंगल और बारिश के कारण इनसे अपेक्षित जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर रहे हैं और ग्रामीणों से तेंदुए की गतिविधियों की जानकारी जुटा रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले करीब एक माह में तेंदुआ और उसके शावक चार बकरों का शिकार कर चुके हैं। इससे आसपास के ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल है।

150 हेक्टेयर में फैला है महामाई का जंगल

महामाई का जंगल करीब 150 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसी क्षेत्र में महामाई की पहाड़ी भी है। तरवरिया की ओर भी घना जंगल है। आसपास पहाड़ियों और चट्टानों का फैलाव होने के कारण तेंदुए के लिए यहां अनुकूल वातावरण बना हुआ है।

जंगल में चट्टानों के बीच बड़ी-बड़ी गुफाएं भी हैं। वन विभाग का अनुमान है कि मादा तेंदुए ने ऐसी ही किसी गुफा को अपने शावकों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनाया होगा। दिन में मादा तेंदुआ और उसके शावक गुफा में रहते हैं और रात के समय भोजन की तलाश में बाहर निकलते हैं।

बारिश के मौसम में जंगल में हरियाली बढ़ने के साथ छोटे जंगली जानवरों की सक्रियता भी बढ़ जाती है। ऐसे में तेंदुए के लिए जंगल में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता भी बनी हुई है।

रेंजर ने कहा- जंगल वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास

रेंजर बृज मीणा ने बताया कि महामाई के जंगल में खरगोश सहित कई छोटे जंगली जानवर हैं। संभावना है कि मादा तेंदुआ और उसके शावक इन्हीं को अपना आहार बना रहे हैं। जंगल वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है, इसलिए यहां तेंदुए की मौजूदगी असामान्य नहीं है।

उन्होंने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से आसपास के क्षेत्रों में चेतावनी और संकेतक बोर्ड लगाए गए हैं। महामाई दरबार के आसपास भी लोगों को सावधान किया गया है।

अपील : रात में अकेले जंगल की ओर न जाएं

रेंजर बृज मीणा ने नागरिकों से अपील की है कि कमलिया-महामाई के आसपास के जंगल क्षेत्र में अकेले न जाएं। विशेषकर रात के समय जंगल की ओर जाने से बचें। महामाई दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु भी समूह में ही आवाजाही करें और वन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

वन विभाग की टीम क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही है, ताकि तेंदुए और उसके शावकों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके तथा ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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