न्यायपालिका भी पूरी तरह RTI के दायरे में आए? 317वीं RTI मीट में गरमाई बहस, प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर,


रीवा। न्यायपालिका को सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे में पूर्ण रूप से लाने और न्यायिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, इस मुद्दे पर शनिवार को आयोजित 317वीं डिजिटल आरटीआई मीट में देशभर के आरटीआई कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने मंथन किया। विशेषज्ञों ने माना कि अदालतों के प्रशासनिक कार्यों में अधिक पारदर्शिता जरूरी है, जबकि जजों की नियुक्ति और कॉलेजियम की आंतरिक प्रक्रिया जैसी संवेदनशील जानकारियां कानून के तहत संरक्षित रहनी चाहिए।
जूम प्लेटफॉर्म पर आयोजित बैठक में उत्तराखंड के आरटीआई रिसोर्स पर्सन एवं कंप्यूटर विभाग प्रमुख वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने वर्ष 2010 से 2023 के बीच सुप्रीम कोर्ट के 11 महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख किया। उन्होंने 2019 के उस ऐतिहासिक निर्णय का हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) के कार्यालय को भी 'पब्लिक अथॉरिटी' मानते हुए आरटीआई के दायरे में माना था। साथ ही खानपुरम प्रकरण, चिकित्सा एवं वित्तीय गोपनीयता से जुड़े निर्णयों तथा एनजेएसी (NJAC) मामले पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि अदालतों के बजट, रिक्त पदों और प्रशासनिक कार्यों से जुड़ी सूचनाएं स्वतः सार्वजनिक की जानी चाहिए। वहीं कॉलेजियम की विचार-विमर्श प्रक्रिया और न्यायिक निर्णय से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को आरटीआई अधिनियम की धारा-8 के तहत सुरक्षित रखा जा सकता है।

बैठक में यह भी सामने आया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में आरटीआई को लेकर अलग-अलग नियम लागू होने से सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में असमानता है। प्रतिभागियों ने सुप्रीम कोर्ट से पूरे देश के लिए एक समान मॉडल रूल्स बनाने की मांग की, ताकि सभी अदालतों में एकरूप व्यवस्था लागू हो सके। साथ ही आरटीआई अधिनियम की धारा-4 के तहत अधिकतम सूचनाओं के स्वतः प्रकटीकरण पर भी जोर दिया गया।

सदस्यों ने नवंबर 2022 में शुरू हुए सुप्रीम कोर्ट के ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल का स्वागत किया, लेकिन मोबाइल के माध्यम से आवेदन करने में आने वाली तकनीकी समस्याओं और व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर भी ध्यान आकर्षित कराया।

बैठक के अंतिम सत्र में आरटीआई आदेशों के पालन में होने वाली देरी, सूचना आयोगों की सीमित शक्तियों तथा आरटीआई कार्यकर्ताओं के प्रति कथित नकारात्मक रवैये पर चिंता व्यक्त की गई। ग्वालियर के हरीश सोलंकी ने पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े मामलों में आरटीआई के माध्यम से उजागर हुई व्यवस्थागत खामियों और भ्रष्टाचार के मुद्दे भी उठाए।

कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने किया। बैठक में बुरहानपुर के देवेंद्र अग्रवाल, ग्वालियर के हरीश सोलंकी, राज तिवारी सहित देश के विभिन्न राज्यों के कई आरटीआई कार्यकर्ता और कानूनी विशेषज्ञ शामिल हुए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ