विदिशा। जिले में लंबित आवेदनों और सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के बढ़ते मामलों पर कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने विभागवार लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा कि आमजन की शिकायतों के निराकरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं करने वाले अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने अपर कलेक्टर श्री अनिल कुमार डामोर को संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
बैठक में सामने आया कि सीएम हेल्पलाइन की कई शिकायतों में निर्धारित समय-सीमा के भीतर जवाब तक प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर कलेक्टर ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि शिकायतों का तथ्यात्मक, संतोषजनक और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को लंबित आवेदनों की नियमित समीक्षा कर अनावश्यक लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश भी दिए।
हर सप्ताह समीक्षा और जनसुनवाई, फिर भी सवाल कायम
जिले में प्रत्येक सोमवार को लंबित मामलों की समीक्षा बैठक और प्रत्येक मंगलवार को जनसुनवाई आयोजित की जाती है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिकायतें समय-सीमा से बाहर बनी रहना प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है। लगातार निर्देश और चेतावनी के बावजूद कई अधिकारी-कर्मचारी शासन की प्राथमिकता वाली सीएम हेल्पलाइन और जनशिकायतों के निराकरण में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
आदेश तो लगातार, कार्रवाई कितनी?
कलेक्टर लगातार सख्त निर्देश जारी कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर प्रभावी कार्रवाई सीमित दिखाई दे रही है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि लापरवाही पर समयबद्ध और ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तो शिकायतों के लंबित रहने की स्थिति में सुधार कैसे आएगा। आमजन की अपेक्षा है कि निर्देशों के साथ-साथ जवाबदेही तय करते हुए दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर प्रभावी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।




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