नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में बुधवार को पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान लोकसभा में उस समय जोरदार हंगामा हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण में "इडियट" शब्द का इस्तेमाल किया। सत्तापक्ष के सांसदों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे असंसदीय करार दिया और शब्द को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की।
राहुल गांधी शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन का मुद्दा उठा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा कि "मैंने सोचा, इडियट भी है और स्टूडेंट भी है। उससे पूछा कि तीसरी कैटेगरी कहां जाती है- अंधभक्त।" उनके इस बयान पर एनडीए सांसदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी छात्र के संदर्भ में असंसदीय शब्द का प्रयोग कर रहे हैं और इसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि जो भी शब्द असंसदीय होगा, उसे कार्यवाही से निकाल दिया जाएगा।
विवाद बढ़ने पर राहुल गांधी ने कहा कि यदि "इडियट" शब्द पर आपत्ति है तो वह उसकी जगह दूसरा शब्द इस्तेमाल कर देंगे। इसके बावजूद स्पीकर ओम बिरला ने "इडियट" शब्द को असंसदीय मानते हुए उसे सदन की कार्यवाही से हटाने (एक्सपंज) का निर्देश दिया।
लोकसभा के नियम 380 के तहत यदि अध्यक्ष को किसी सदस्य द्वारा प्रयुक्त शब्द या टिप्पणी मानहानिकारक, अशोभनीय, असंसदीय या सदन की गरिमा के प्रतिकूल प्रतीत होती है, तो उसे कार्यवाही से हटाने का अधिकार है।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि देश के युवाओं का गुस्सा जायज है। उन्होंने कहा कि छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है और यह देश के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि युवाओं का सम्मान होना चाहिए, क्योंकि वही देश का भविष्य हैं और वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भाजपा नेताओं को भी अपने बच्चों से पूछना चाहिए कि शिक्षा व्यवस्था में क्या गलत हो रहा है।
एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान हुए इस घटनाक्रम ने सदन का माहौल गरमा दिया और कुछ समय तक सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।




0 टिप्पणियाँ