जांच से पहले ही खाली हो गया आनंदपुर का मेडिकल बाजार

ड्रग इंस्पेक्टर की कार्रवाई की सूचना पहले पहुंची या मेडिकल संचालक संयोग से गायब हुए? दो दुकानों की जांच के बाद उठे कई सवाल

आनंदपुर। मेडिकल स्टोरों के नियमों के अनुसार संचालन की जांच के लिए जब ड्रग इंस्पेक्टर जान प्रवीण कुजूर टीम के साथ आनंदपुर पहुंचे तो कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो गए। चर्चा यह रही कि अधिकारी के पहुंचने से पहले ही कई मेडिकल और निजी क्लीनिक संचालकों को जांच की जानकारी मिल गई और कई प्रतिष्ठान बंद नजर आए।


अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जांच विभागीय और अचानक थी तो इसकी सूचना मेडिकल संचालकों तक पहले कैसे पहुंची? क्या जांच की जानकारी पहले ही लीक हो गई थी या फिर दुकानों का बंद मिलना महज संयोग था? इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

अधिकारी पहुंचे तो कई दुकानें बंद

कलेक्टर के निर्देशानुसार ड्रग विभाग द्वारा मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस, फार्मासिस्ट की उपलब्धता, बिक्री बिल और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इसी क्रम में आनंदपुर में भी निरीक्षण किया गया।

जांच के दौरान श्रीराम मेडिकल और पारस मेडिकल का निरीक्षण किया गया। बिक्री से संबंधित सेल्स बिल संधारित किए जा रहे हैं या नहीं, इसकी जानकारी मांगी गई। बताया गया कि दोनों मेडिकल स्टोर मौके पर बिक्री बिल प्रस्तुत नहीं कर पाए।

वहीं अनिल मेडिकल और तीर्थस मेडिकल बंद पाए गए। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिन मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण नहीं हो पाया, वहां नियमों का पालन किस तरह हो रहा है, इसकी जांच कब होगी?


एक दुकान पर फार्मासिस्ट नहीं मिला

निरीक्षण के दौरान एक मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट मौजूद नहीं मिला। इसके अलावा बिक्री से संबंधित बिलों के संधारण को लेकर भी कमी सामने आने की बात कही गई। संबंधित संचालक को आवश्यक बिल और दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

सिर्फ दो दुकानों की जांच… बाकी का क्या?

ड्रग विभाग के अनुसार आनंदपुर में कुल 8 मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं, जिनमें 6 रिटेल और 2 होलसेल बताए गए हैं।

ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि यदि सभी मेडिकल स्टोर विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हैं और उनके लाइसेंस विभाग द्वारा जारी किए गए हैं तो सभी दुकानों की जांच एक साथ क्यों नहीं हुई?

क्या बाकी मेडिकल स्टोरों पर भी लाइसेंस, फार्मासिस्ट, बिक्री बिल और दवाओं के रिकॉर्ड की जांच होगी? अगर होगी तो कब और किस आधार पर? इन सवालों के जवाब अब विभागीय कार्रवाई से ही सामने आएंगे।

जांच में खाना-पूर्ति मौके की तस्वीरों ने खड़े किए सवाल

निरीक्षण के दौरान आसपास खड़े ग्रामीणों ने जांच की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। आरोप है कि कुछ मेडिकल स्टोरों पर जांच की प्रक्रिया महज औपचारिकता तक सीमित दिखाई दी।

हालांकि, वास्तविक रूप से कितने दस्तावेजों की जांच की गई और किन-किन नियमों का उल्लंघन मिला, इसका स्पष्ट विवरण विभाग द्वारा जारी होने वाले नोटिस और आगे की कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा। वही लोगों का मानना यह भी है इससे पहले 6-7 माहा पहले अवैध क्लनिको की 3 दुकानों अनुविभागीय अधिकारी के द्वारा अवैध क्लीनिक सील करने की कार्यवाही की थी लेकिन कुछ महीने के भीतर ही सील की गई क्लीनिक चालू हो गई 

लाइसेंस विभाग के पास, फिर लोकेशन की जानकारी के लिए गार्ड से पूछताछ क्यों?

जांच के दौरान एक और सवाल चर्चा में आया। मेडिकल स्टोरों की जानकारी लेने के लिए अधिकारी आनंदपुर अस्पताल के गार्ड से भी मेडिकल दुकानों के संबंध में जानकारी लेते दिखाई दिए।

यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस विभागीय प्रक्रिया के तहत जारी होते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विभाग के पास लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोरों की पूरी सूची और उनके पंजीकृत पते/प्रतिष्ठान की जानकारी उपलब्ध नहीं थी?

यदि रिकॉर्ड में दुकान का पता और स्थान दर्ज है तो मौके पर उसकी लोकेशन पता करने के लिए बाहरी व्यक्ति से जानकारी लेने की जरूरत क्यों पड़ी? और यदि रिकॉर्ड में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है तो लाइसेंस जारी करने और रिकॉर्ड संधारण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

लाइसेंस देते समय जांच, फिर कार्रवाई के लिए नोटिस का इंतजार क्यों?

मेडिकल स्टोर को लाइसेंस निर्धारित नियमों और दस्तावेजों के आधार पर दिया जाता है। ऐसे में एक सवाल यह भी है कि लाइसेंस जारी होने के बाद विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं की गई?

यदि किसी मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट, बिक्री बिल या अन्य जरूरी रिकॉर्ड को लेकर कमी है तो उसका पता नियमित निरीक्षण में क्यों नहीं चला?

अब नोटिस जारी होने के बाद विभाग संचालकों के जवाब के आधार पर क्या कार्रवाई करता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

शो-कॉज नोटिस के बाद तय होगी कार्रवाई

ड्रग इंस्पेक्टर जान प्रवीण कुजूर ने बताया कि जांच में सामने आई कमियों के आधार पर संबंधित मेडिकल स्टोर संचालकों को शो-कॉज नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। दस्तावेज और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए जाएंगे। जवाब और रिकॉर्ड की जांच के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई में ये अधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद

निरीक्षण कार्रवाई के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर जान प्रवीण कुजूर, लटेरी बीएमओ इंद्रजीत रघुवंशी, डॉ. बीके रॉय सहित अन्य स्वास्थ्य विभाग का स्टाफ मौजूद रहा।

कार्रवाई में पटवारी अंकित पोगारिया तथा कोटवार कैलाश सोनी भी मौजूद रहे।

अब सबसे बड़ा सवाल... जिनके जवाब प्रशासन को देना है 

क्या आनंदपुर के सभी मेडिकल स्टोरों की निष्पक्ष और पूर्ण जांच होगी?

जिन दुकानों पर जांच नहीं हो सकी, वहां लाइसेंस, फार्मासिस्ट और बिक्री बिल की स्थिति कब जांची जाएगी?

क्या जांच की सूचना पहले से संचालकों तक पहुंची थी या दुकानें बंद मिलना महज संयोग था?

और सबसे अहम—दो दुकानों की जांच में मिली कमियों के बाद बाकी मेडिकल स्टोरों पर विभाग क्या कार्रवाई करता है?

इन सवालों के जवाब शो-कॉज नोटिस, संचालकों के जवाब और विभाग की आगामी कार्रवाई से सामने आएंगे। फिलहाल ड्रग विभाग की यह कार्रवाई जांच से ज्यादा कई नए सवाल छोड़ गई है।

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