आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर मंथन, कानून को प्रभावी बनाने की उठी मांग

रीवा। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ताओं की सुरक्षा, सूचना आयोगों में लंबित मामलों और आरटीआई कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शनिवार को आयोजित 318वीं राष्ट्रीय आरटीआई बैठक में विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई। वक्ताओं ने कहा कि पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था के लिए आरटीआई की मूल भावना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

बैठक में आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने देशभर में आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों, धमकियों और उत्पीड़न का उल्लेख करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और भूमि संबंधी मामलों को उजागर करने वाले कार्यकर्ताओं को प्रभावी सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने व्हिसलब्लोअर संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधीर सक्सेना एवं न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा ने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आरटीआई कार्यकर्ताओं को कानूनी संरक्षण देना जरूरी है। उन्होंने संबंधित कानूनों में आवश्यक संशोधन कर सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर बल दिया।

बैठक में आरटीआई अधिनियम के कमजोर क्रियान्वयन पर भी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि कई मामलों में सार्वजनिक प्राधिकरण वित्तीय लेन-देन, नियुक्तियों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी जानकारी देने में अनावश्यक देरी करते हैं या आवेदन निरस्त कर देते हैं। सूचना आयोगों में अपीलों के वर्षों तक लंबित रहने पर भी चिंता जताई गई।

पूर्व मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने सुझाव दिया कि आरटीआई आवेदनों एवं द्वितीय अपीलों के निस्तारण के लिए समयबद्ध कैलेंडर लागू किया जाए, ताकि वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों का शीघ्र निराकरण हो सके।

बैठक में न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने, विशेष मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था विकसित करने तथा सूचना आयोगों के ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी सुधार करने की भी मांग उठी।

आरटीआई आवेदन की प्रक्रिया पर मार्गदर्शन देते हुए वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने कहा कि आवेदक "क्यों" और "कैसे" जैसे प्रश्न पूछने के बजाय संबंधित आदेशों, अभिलेखों और दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगें, जिससे सूचना प्राप्त करने में अनावश्यक विवाद की स्थिति न बने।

कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने किया। छत्तीसगढ़ के आरटीआई कार्यकर्ता देवेंद्र अग्रवाल ने भी कार्यक्रम के संचालन में सहयोग दिया। बैठक में राज तिवारी, पारवानी, नरेश सैनी, शुभम सोनी, जयपाल सिंह खींची, फतेह चंद्र गुलेरिया सहित देशभर से सैकड़ों आरटीआई कार्यकर्ता एवं नागरिक शामिल हुए।

बैठक का समापन आरटीआई कानून की मूल भावना को सुरक्षित रखने, प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ।

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